गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करने से मिट्टी का कायाकल्प होने के साथ किसानों को कई फायदे मिलते हैं. मॉनसून के आगमन से पहले भीषण गर्मी के दौरान खेतों की गहरी जुताई से ना सिर्फ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, बल्कि हानिकारक कीटों और बीमारियों का भी प्राकृतिक रूप से नाश हो जाता है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, मॉनसून की पहली बारिश से पहले ही गहरी जुताई करनी फायदेमंद होती है. इससे पानी का बेहतर संरक्षण होता है और फसल उत्पादन में 15 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है.
क्यों जरूरी है मॉनसून पूर्व गहरी जुताई?
लगातार पारंपरिक जुताई और भारी यंत्रों के उपयोग से ज्यादातर खेतों में 6-8 इंच की गहराई पर 'हार्डपैन' (कठोर परत) बन गई है. यह परत जड़ों को नीचे जाने से रोकती है, पानी और हवा के संचार को बाधित करती है और पोषक तत्वों की पहुंच सीमित कर देती है. गहरी जुताई इसी समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून से 10-20 दिन पहले गहरी जुताई करने से बारिश का पानी मिट्टी में गहराई तक रिस जाता है. इससे न सिर्फ जल संरक्षण होता है बल्कि सूखे की स्थिति में भी फसल को लगातार नमी मिलती रहती है.
गहरी जुताई के प्रमुख लाभ
कठोर परत टूटने से जड़ें गहराई तक फैल पाती हैं. पौधे ज्यादा मजबूत, रोग-प्रतिरोधी और ऊंचे होते हैं.
अध्ययनों में पाया गया है कि गहरी जुताई से सिंचाई की जरूरत 20-25% तक कम हो जाती है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और विदर्भ के किसानों के लिए यह खासतौर पर फायदेमंद है.
गहराई से पोटाश, फॉस्फोरस, जिंक और अन्य सूक्ष्म तत्व ऊपर आ जाते हैं. केमिकल खादों पर निर्भरता घटती है और मिट्टी की सेहत सुधरती है.
खरपतवार के बीज गहराई में दब जाते हैं और कई मिट्टी जनित रोग व कीट कम हो जाते हैं.
कब, कैसे और कितनी गहराई तक करें जुताई?
गहरी जुताई एक बार करने से दो-तीन फसलों तक फायदा मिलता है. यह मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाती है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी कम करती है. ध्यान दें कि हर साल गहरी जुताई न करें लेकिन 3 साल में कम से कम एक बार गहरी जुताई जरूर करें.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क