गर्मियों में खीरे की खेती से कमाई का मौका, 60 दिन में तैयार होगी फसल, जानें तरीका

गेहूं की फसल कटने के बाद किसान खाली खेत में खीरे की खेती करके बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है. बीज की सही मात्रा, सिंचाई, खाद और देखभाल से बढ़िया उपज मिल सकती है. आइए जानते हैं.

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खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है (फाइल फोटो- ITG) खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है (फाइल फोटो- ITG)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:14 AM IST

गर्मी का मौसम शुरू होते ही सब्जी बाजार में खीरे की मांग बढ़ जाती है. अगर आप किसान हैं और कम समय में अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो खीरे की खेती आपके लिए बढ़िया ऑप्शन हो सकता है. गेहूं की फसल काटने के बाद खाली खेत में खीरे की खेती की जाए तो फायदे का सौदा साबित हो सकती है. सही तरीके से खेती करने पर खीरे की फसल सिर्फ 60 दिन में तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ अच्छा मुनाफा दे सकती है.

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खीरा एक ऐसी फसल है जो गर्म और नम जलवायु में अच्छी पैदावार देती है. खीरे की खेती के लिए तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस सबसे उपयुक्त माना जाता है. अप्रैल में बुवाई करके जून तक तुड़ाई शुरू की जा सकती है. गर्मियों में खीरे की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.

कैसी मिट्टी में होती है खीरे की खेती?
खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है. मिट्टी का pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए. खेत में पानी का अच्छा निकास जरूरी है.

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कैसे तैयार करें खेत?

  • खेत को 2-3 बार अच्छी तरह जोतें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए.
  • आखिरी जुताई में 8-10 टन प्रति एकड़ सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं.
  • मेड़ या क्यारी बनाएं. लाइन से लाइन की दूरी 60 से 150 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 60 सेंटीमीटर रखें.
  • कुछ किसान प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल करते हैं, जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं.

बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका
एक एकड़ खेत के लिए लगभग 1 किलोग्राम बीज काफी होते हैं. हाइब्रिड किस्मों में 200-400 ग्राम प्रति एकड़ भी पर्याप्त होते हैं. प्रति हेक्टेयर 2-3 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीजों को 4-6 घंटे पानी में भिगोकर उपचारित करें. बीज को 2-3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं. F1 हाइब्रिड बीज चुनें, जैसे Pusa Uday, Pusa Barkha, Punjab Naveen या HW-216 किस्में जल्दी तैयार होती हैं. इनमें रोग लगने की संभावना भी कम होती है. 

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खाद और उर्वरक

  • बेसल डोज में गोबर की खाद के अलावा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश दें.
  • नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बांटकर दें. जैसे बुवाई के समय, फूल आने पर और फल बनते समय.
  • समय-समय पर जैविक खाद या पत्ती स्प्रे का इस्तेमाल करें.

सिंचाई और देखभाल

  • गर्मी में खीरे को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. कुल 10-12 सिंचाइयां काफी हैं. बुवाई से पहले एक सिंचाई जरूर करें.
  • शुरुआत में 2-3 दिन के अंतराल पर पानी दें.
  • बाद में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें.
  • ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी रहती है क्योंकि इससे पानी बचता है और जड़ों को सीधा पानी मिलता है. खरपतवार निकालने के लिए 2-3 बार निराई-गुड़ाई करना उचित है.

फसल कब तैयार होती है और तुड़ाई कैसे करें?
बुवाई के 30-40 दिन बाद फूल आने शुरू हो जाते हैं. 60 दिन में पहली तुड़ाई हो सकती है. खीरे को छोटा और हरा रहते हुए तोड़ें, जब बीज नरम हों.सामान्य खेती में प्रति एकड़ 33-70 क्विंटल तक उपज मिल सकती है. 
 

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