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हर दिन 10 लाख से ज्यादा यात्रियों को नहीं मिल पाती ट्रेनों में सीट: अध्ययन

RailYatri.in की ओर से जनवरी 2016 से अंतर का विश्लेषण करने के लिए देशभर में टिकट बुकिंग पैटर्न पर नजर रखी जा रही है. देशभर के ट्रेन यात्रियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अध्ययन में खुलासा किया गया कि 10 से 12 लाख मुसाफिर ऐसे हैं जो डेली बेसिस पर कन्फर्म नहीं हुए टिकटों के चलते सफर नहीं कर पाते.

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जनवरी 2016 से अब तक के आंकड़े
जनवरी 2016 से अब तक के आंकड़े

एक ताजा अध्ययन में सामने आया है कि हर दिन 10 लाख से ज्यादा मुसाफिर टिकट नहीं मिलने की वजह से ट्रेनों में सफर नहीं कर पाते हैं. लंबी दूरी की ट्रेनों में मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर है यानी किसी खास गाड़ी में उपलब्ध सीटों की संख्या की तुलना में अधिक लोग सफर करना चाहते हैं. हालांकि इस अंतर को कभी भी ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है.

RailYatri.in की ओर से जनवरी 2016 से अंतर का विश्लेषण करने के लिए देशभर में टिकट बुकिंग पैटर्न पर नजर रखी जा रही है. देशभर के ट्रेन यात्रियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अध्ययन में खुलासा किया गया कि 10 से 12 लाख मुसाफिर ऐसे हैं जो डेली बेसिस पर कन्फर्म नहीं हुए टिकटों के चलते सफर नहीं कर पाते. ये वे लोग हैं जिनके वेटलिस्ट टिकट कन्फर्म नहीं हुए. प्रतिशत के आधार पर देखें तो यह रोजाना लंबी दूरी के ट्रेन यात्रियों का लगभग 13 फीसदी है. पीक सीजन में तो यह आंकड़ा बढ़कर 19 प्रतिशत पहुंच जाता है.

इस मॉडल के आधार पर विश्लेषण
RailYatri.in ने 3100 रेलवे स्टेशनों पर 2800 गाड़ियों में सीट तलाश रहे 30 लाख से अधि‍क यात्रियों की ओर से दर्ज ट्रैवल प्लान का विश्लेषण करने के लिए गणि‍तीय मॉडल का उपयोग किया. प्रिडिक्शन मॉडल के इस्तेमाल से अनुमान लगाया गया कि इस असर डेली बेसिस पर देश पर पड़ रहा है.

आनंद विहार रेलवे स्टेशन का प्रतिशत सबसे ज्यादा
इस अध्ययन में प्रमुख स्टेशनों और यात्रियों के प्रतिशत की एक लिस्ट तैयार की गई जिन्होंने टिकट तो बुक कराया लेकिन सीट कन्फर्म नहीं होने के चलते सफर नहीं कर सके. उदाहरण के तौर पर दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन से टिकट आरक्षित कराने वाले करीब 43 प्रतिशत यात्रियों का रिजर्वेशन पक्का नहीं हो पाता. जम्मू तवी स्टेशन से हर रोज करीब 38 प्रतिशत यात्रियों का टिकट कन्फर्म नहीं हो पाता. मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल पर करीब 33 प्रतिशत यात्रियों को आरक्षित टिकट नहीं मिल पाता.

हावड़ा रेलवे स्टेशन से 28 प्रतिशत यात्रियों को प्रतिदिन टिकट नहीं मिल पाता. इसके अलावा बंगलुरु सिटी जंक्शन और हरिद्वार जंक्शन पर 21 प्रतिशत, पुणे जंक्शन और गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर 20 प्रतिशत, चेन्नई सेंट्रल और गोरखपुर जंक्शन पर प्रतिदिन 19 प्रतिशत यात्रियों को आरक्षित टिकट नहीं मिल पाता.

लंबी दूरी के लिए अभी भी ट्रेन पर भरोसा
RailYatri.in के सीईओ और सह-संस्थापक मनीष राठी कहते हैं, 'हमारे अध्ययन में सरप्लस मांग का पैमाना हम सभी के लिए आंखें खोल देने वाला है. ट्रांसपोर्ट के विकल्प बढ़ने के बावजूद लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेनें अभी भी सबसे पसंदीदा साधन बनी हुई है.' राठी ने बताया कि अधिक से अधि‍क ट्रेनें चलाना इस समस्या का आदर्श समाधान है. हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि हर दिन सैकड़ों एक्स्ट्रा ट्रेनें चलाई जाएं. ट्रेन यात्रियों को व्यावहारिकता के मुताबिक अब मल्टी-मॉडल ट्रैवल अप्रोच पर विचार किए जाने की जरूरत है. RailYatri का एक प्रयास लंबी दूरी की बसों, टैक्सियों आदि से यात्रियों को जोड़कर उन्हें ऐसा करने में सक्षम बनाना है.

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