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बंटवारे के समय बरती जाती सावधानी तो भारत में होता करतारपुर साहिब: राजनाथ सिंह

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा कि करतारपुर साहिब पाकिस्तान में नहीं, बल्कि भारत में हो सकता था, यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाती. उन्होंने कहा कि विभाजन के समय सिखों को काफी नुकसान उठाना पड़ा.

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राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'सिखों का आजादी के समय बहुत नुकसान हुआ'
  • किताब की लॉन्चिंग कार्यक्रम में बोले राजनाथ सिंह

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा कि करतारपुर साहिब पाकिस्तान में नहीं, बल्कि भारत में हो सकता था, यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाती. उन्होंने कहा कि विभाजन के समय सिखों को काफी नुकसान उठाना पड़ा.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ''अगर बंटवारे के समय थोड़ी सी सावधानी बरती जाती तो करतारपुर साहिब पाकिस्तान में नहीं, भारत में होता. स्वतंत्रता संग्राम में सिख समुदाय का बड़ा योगदान था.'' उन्होंने आगे कहा कि जब हमें आजादी मिली और विभाजन की त्रासदी का सामना करना पड़ा, तो सिखों को बहुत नुकसान हुआ. राजनाथ सिंह शुक्रवार को 'शाइनिंग सिख यूथ ऑफ इंडिया' नामक किताब के लॉन्चिंग कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम में आगे कहा, ''भारतीय संस्कृति को अतीत में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा. अगर भारतीय संस्कृति आज कायम है तो वह सिख समुदाय की वजह से है. सिख समुदाय का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि उनमें से बहुत से लोग अपना इतिहास नहीं जानते.''

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उन्होंने कहा, ''मैं कहूंगा कि अपने युवाओं को सिख समुदाय का इतिहास सिखाएं. यह देश सिख समुदाय के योगदान को कभी नहीं भूलेगा. कुछ लोग 'खालिस्तान' की मांग करते हैं. आप 'खालिस्तान' की बात क्यों करते हैं, पूरा 'हिंदुस्तान' आपका है.''

सिखों का धार्मिक स्थल है करतारपुर साहिब गुरुद्वारा

बता दें कि करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिखों का एक धार्मिक स्थल है, जोकि पाकिस्तान में स्थित है. इसी गुरुद्वारे को गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के आखिरी साल बिताए थे. यहां पर उन्होंने तकरीबन 16 साल तक जीवन व्यतीत किया था. उनके शरीर को त्यागने के बाद इस गुरुद्वारे को बनवाया गया था.

यह गुरुद्वारा पाकिस्तान के नारवाल जिले में है और यह भारत की सीमा से सिर्फ तीन किलोमीटर की दूरी पर ही है. लाहौर से इसकी दूरी तकरीबन 120 किलोमीटर की है. पहले भारत के श्रद्धालु करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का दर्शन दूरबीन से करते थे, जिसे भारत और पाकिस्तान की सरकार ने मिलकर कॉरिडोर बनावा दिया था. 

 

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