यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इजरायल द्वारा रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों से अनाज खरीदे जाने पर सख्त ऐतराज जताया है. जेलेंस्की ने कहा है कि रूस द्वारा 'चोरी' किए गए यूक्रेनी अनाज की खरीद किसी भी तरह से 'जायज बिजनेस' नहीं हो सकता. उन्होंने इजरायल को याद दिलाया कि यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों से अनाज खरीदना खुद इजरायल के अपने कानूनों का भी उल्लंघन है.
जेलेंस्की के मुताबिक, यूक्रेन अब एक विशेष प्रतिबंध पैकेज तैयार कर रहा है, जो उन लोगों और संस्थाओं को टारगेट करेगा, जो इस चोरी के अनाज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या इससे फायदा कमाने में लगे हुए हैं.
राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि इजरायली अधिकारी यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचेंगे, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचता हो.
द्विपक्षीय संबंधों पर खतरा
जेलेंस्की ने इजरायली अधिकारियों से कहा है कि वे यूक्रेन के प्रति सम्मान दिखाएं और ऐसी गतिविधियों से दूर रहें, जो उनके आपसी रिश्तों की बुनियाद को कमजोर करती हैं. यूक्रेन का तर्क है कि कब्जे वाले इलाकों से संसाधनों का दोहन करना न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि यह इंटरनेशनल नियमों का भी खुला उल्लंघन है. जेलेंस्की के इस कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनाज के अवैध व्यापार और युद्धग्रस्त क्षेत्रों के संसाधनों पर कंट्रोल के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है.
जंग में कई भारतीयों की मौत
पिछले दिनों केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रूस गए 10 भारतीय यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ते हुए मारे गए हैं. केंद्र ने यह भी कहा कि उनमें से ज़्यादातर लोगों ने रूसी सेना के हिस्से के तौर पर अपनी मर्ज़ी से किए गए कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर यह युद्ध लड़ा था.
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चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच 26 भारतीयों के परिवारों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में दावा किया गया था कि ये लोग नौकरी की तलाश में रूस गए थे, लेकिन वहां उन्हें धोखे और ज़बरदस्ती से युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया गया.
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