व्हाइट हाउस सैन्य दबाव से अब कूटनीति की ओर तेजी से कदम बढ़ाने लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक उच्च-स्तरीय टीम को पाकिस्तान भेजने का फैसला लिया है, जिसकी अगुवाई वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस करेंगे.
प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लीविट ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ बातचीत के लिए अपनी नेगोशिएशन टीम भेज रहा है, और इसका पहला दौर शनिवार को होगा.
यह घोषणा टकराव से कूटनीति की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत देती है, हालांकि व्हाइट हाउस सार्वजनिक तौर पर सख्त रुख बनाए हुए है. लीविट ने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद, ईरान की क्षेत्र में अपने प्रॉक्सी समूहों को हथियार पहुंचाने की क्षमता काफी कमजोर हो गई है. उन्होंने कहा, “ईरान अब अपने प्रॉक्सी समूहों तक हथियार नहीं पहुंचा सकता है.
लीविट ने यह भी खुलासा किया कि तेहरान के पहले दिए गए प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया था. उन्होंने कहा, “ईरान ने शुरुआत में 10 बिंदुओं का जो प्रस्ताव दिया था, वह पूरी तरह गैर-गंभीर और अस्वीकार्य था, जिसे ट्रंप ने सीधे खारिज कर दिया.”
खुल गए हैं बातचीत के रास्ते
कैरोलाइन लीविट ने बताया कि मंगलवार को ईरान की ओर से दिए गए संशोधित प्रस्ताव ने बातचीत का रास्ता खोल दिया है. नया प्रस्ताव अब अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव के साथ मेल खा सकता है और संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत का आधार बन सकता है.
पाकिस्तान में होने वाली ये वार्ता तेज कूटनीतिक गतिविधियों के बीच हो रही है. ट्रंप ने मंगलवार को इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की, जबकि अमेरिकी अधिकारी चीन के साथ भी संपर्क में हैं.
लीविट ने यह भी कहा कि ईरान संकेत दे चुका है कि वह एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने पर विचार कर सकता है, जो पहले की वार्ताओं में एक बड़ा विवाद का मुद्दा रहा है.
इसके अलावा कैरोलाइन लीविट ने जानकारी दी है कि डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तेल टैंकरों और अन्य जहाजों के लिए बिना किसी पाबंदी, यहां तक कि बिना किसी टोल के पूरी तरह खुला रहे.
उन्होंने कहा, “ट्रंप की तत्काल प्राथमिकता यह है कि जलडमरूमध्य को बिना किसी तरह की रोक-टोक, चाहे वह टोल के रूप में हो या किसी और तरीके से, फिर से खोला जाए.”
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