अमेरिकी सेना द्वारा कथित तौर पर ईरानी तेल ले जा रहे दो टैंकरों को जब्त करने के बाद ईरान ने अमेरिका की कड़ी निंदा की है. ईरान ने इस कार्रवाई को समुद्र में सशस्त्र डकैती और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वाशिंगटन पर समुद्री डकैती को वैध ठहराने का आरोप लगाया है.
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बघाई ने बताया कि अमेरिका का यह कदम समुद्री डाकुओं की वापसी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारी आधिकारिक झंडों के तहत गैरकानूनी लूट को सही ठहराने के लिए कानूनी वारंट का इस्तेमाल कर रहे हैं.
अमेरिका ने बताया कानूनी कार्रवाई
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस कदम का बचाव करते हुए इसे कानूनी कार्रवाई बताया. जीनिन फेरिस पिरो ने कहा कि अमेरिकी सेना ने अदालत से मंजूरी मिले वारंट के तहत टैंकर मैजेस्टिक एक्स और टिफानी को जब्त किया था.
पिरो के अनुसार, हिंद महासागर में जब दोनों जहाजों को रोका गया, तब उनमें से प्रत्येक में लगभग 19 लाख बैरल ईरानी तेल था. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई अवैध तेल नेटवर्क को तोड़ने और प्रतिबंध के बाद किसी को मुनाफा कमाने से रोकने के प्रयास का हिस्सा है.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी एजेंसियां राष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारों के साथ मिलकर ऐसे मामलों की लगातार जांच, निगरानी और कार्रवाई करती रहेंगी.
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अमेरिका की चेतावनी
इस बीच, अमेरिका ने दुनियाभर की कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे ईरान की एयरलाइंस को सेवाएं देती हैं, तो उन्हें प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है.
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो कंपनियां ईरानी विमानों को जेट ईंधन, कैटरिंग, लैंडिंग सेवाएं या मेंटेनेंस जैसी सुविधाएं देती हैं, उन पर ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में बेसेंट ने विदेशी सरकारों से अपील की कि वे अपने-अपने देशों में कंपनियों को यह सुनिश्चित करने को कहें कि वे किसी भी रूप में ईरान की एयरलाइंस की मदद न करें.
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