ईरान के साथ हुए सीजफायर के बाद अब अमेरिका फिर से अपने यूरोपीय सहयोगियों पर दबाव बना रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से डिमांड की है कि वो दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका के साथ आएं. ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि अब सिर्फ समर्थन के लिए केवल बयान देना काफी नहीं है.
अमेरिका और यूरोपीय देशों के रक्षा समूह NATO ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि अमेरिका अब फिर से अपने सहयोगियों पर दबाव डाल रहा है. उसने कहा है कि यूरोपीय देश जल्द बताएं कि आने वाले दिनों में वो होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कैसे मदद करेंगे.
अमेरिका ने यह मुद्दा व्हाइट हाउस, पेंटागन और विदेश विभाग में हुई हाई लेवल बैठकों में उठाया. ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुट से मुलाकात के दौरान भी यह मुद्दा उठाया.
ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर साधा निशाना
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सहयोगियों और नाटो पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक दबाव यानी जोर-जबरदस्ती से न समझाया जाए, तब तक ये देश मुद्दों को समझते नहीं हैं.
मार्क रुट ने भी कई देशों से कह दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि अगले कुछ दिनों में होर्मुज की सुरक्षा को लेकर देश अपने पत्ते खोलें कि वो कैसे मदद करेंगे.
ब्रिटेन के नेतृत्व में 40 से ज्यादा देशों, जिनमें यूरोपीय देश, जापान और कनाडा शामिल हैं, ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करने की बात कही है. यह रास्ता दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और गैस की सप्लाई के लिए अहम है.
ईरान जंग में सीजफायर हो चुका है, हालांकि जमीनी हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं. 14 दिन के सीजफायर के ऐलान के बाद भी पूरी तरह लड़ाई नहीं थमी है. ईरान ने लेबनान में जारी इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताया है, और होर्मुज स्ट्रेट अब भी काफी हद तक बंद है. जहाजों की आवाजाही शुरू होने के कोई साफ संकेत नहीं हैं.
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गलिबाफ ने कहा कि लेबनान और ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ इस सीजफायर का अहम हिस्सा हैं.
ईरान युद्ध ने अमेरिका को कर दिया अपने यूरोपीय सहयोगियों से दूर
ईरान जंग ने अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद भी उजागर कर दिए हैं. हाल के हफ्तों में कई यूरोपीय देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी जंग का खुलकर समर्थन नहीं किया और लड़ाई जारी रहने के दौरान होर्मुज में हस्तक्षेप करने से भी हिचकिचाए.
ट्रंप ने इस रुख की खुलकर आलोचना की. मार्क रुट से मुलाकात के बाद उन्होंने लिखा, 'जब हमें जरूरत थी, तब नाटो हमारे साथ नहीं था, और आगे भी नहीं होगा.'
ट्रंप ने कई बार नाटो की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और यहां तक कहा है कि अमेरिका इस गठबंधन से अलग भी हो सकता है.
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