अमेरिका-इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद से ही जंग जारी है. इस संघर्ष को दो हफ्ते से अधिक समय हो चुका है, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं. इस युद्ध का असर अब पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है. इस बीच सोमवार को अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिण-पूर्वी ईरान के चाबहार फ्री ट्रेड-इंडस्ट्रियल जोन के पास हमला किया.
अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई मिडिल ईस्ट में अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर ईरान के हमलों के जवाब के रूप में देखी जा रही है.
वहीं, ईरान ने रेड सी (लाल सागर) में अमेरिकी एयरक्राफ़्ट कैरियर गेराल्ड फोर्ड की उपस्थिति को ईरान के लिए खतरा बताया है. ईरान के खतम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहीम जोलफाघारी ने कहा लाल सागर में इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को समर्थन देने वाले सभी लॉजिस्टिक और सेवा केंद्र ईरानी सशस्त्र बलों के निशाने पर माने जाएंगे.
ईरान ने यूएसएस गेराल्ड फोर्ड को खतरा बताते हुए कहा है कि इसके सहायक केंद्र निशाने पर हैं.
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ईरान ने चेतावनी दी है कि इस कैरियर के संचालन में सहयोग करने वाला कोई भी बुनियादी ढांचा हमले का निशाना बन सकता है. रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि लाल सागर में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह को सेवाएं देने वाले सहायता केंद्र अब उसके परिचालन नेटवर्क का हिस्सा माने जाएंगे. इसलिए उन्हें वैध लक्ष्य माना जा सकता है.
यह चेतावनी ईरान और अमेरिका के साथ-साथ क्षेत्र में उसके सहयोगियों के बीच जारी टकराव के बीच सामने आई है.
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को रोकना है.
पश्चिम एशिया में अमेरिका बढ़ा रहा सैन्य ताकत
पिछले कुछ हफ्तों में खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संपत्तियों, बुनियादी ढांचे और समुद्री मार्गों को निशाना बनाते हुए हमले किए गए हैं. अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ़्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड अमेरिकी नौसेना के सबसे उन्नत युद्धपोतों में से एक माना जाता है.
इसे एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के हिस्से के रूप में तैनात किया गया है, जिसका मकसद पश्चिम एशिया में वॉशिंगटन की सैन्य मौजूदगी को मजबूत करना है.
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