ईरान ने अमेरिका समर्थित 9 सूत्रीय शांति प्रस्ताव के जवाब में रविवार को अपना विस्तृत 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेज दिया है. पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए भेजे गए इस जवाब में तेहरान ने केवल अस्थायी सीजफायर के बजाय संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने की इच्छा जताई है. वाशिंगटन के दो महीने के सीजफायर के प्रस्ताव को खारिज करते हुए ईरान ने सभी विवादों को 30 दिनों के अंदर सुलझाने की बात कही है. इस प्रस्ताव में भविष्य के हमलों के खिलाफ गारंटी, अमेरिकी सेना की वापसी और नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करने जैसी शर्तें शामिल हैं.
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर इस प्रस्ताव का रिव्यू (समीक्षा) करने की बात कही है. हालांकि, ट्रंप ने संदेह जताते हुए कहा है कि ईरान ने अब तक अपने दशकों के कृत्य की पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है.
30 दिन में सभी मुद्दों का समाधान
तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान ने अमेरिका समर्थित 9 सूत्री प्रस्ताव का औपचारिक रूप से जवाब देते हुए एक विस्तृत 14 सूत्री योजना प्रस्तुत की है, जिसमें उसने चल रही दुश्मनी को समाप्त करने के लिए अपनी शर्तें बताई हैं.
तेहरान ने अपनी शर्तों में स्पष्ट किया है कि वह अस्थायी सीजफायर से आगे बढ़कर संघर्ष का व्यापक समाधान चाहता है, जबकि वाशिंगटन ने अपने प्रस्ताव में दो महीने के सीजफायर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन ईरान ने लंबे वक्त तक चलने वाले सीजफायर के विचार को खारिज करते हुए जोर दिया कि सभी मुख्य मुद्दों का समाधान 30 दिनों के अंदर किया जाना चाहिए.
ईरान ने अपने इस प्रस्ताव में क्षेत्र के सुरक्षा और आर्थिक ढांचे को नया रूप देने, भविष्य के हमलों के खिलाफ गारंटी, अमेरिकी सेना की वापसी और नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करने जैसी शर्तें शामिल हैं
साथ ही ईरान ने द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म करने का आह्वान किया है. उसने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा और नेविगेशन के लिए एक नया तंत्र बनाने का भी सुझाव दिया है.
'इस प्रस्ताव का स्वीकार होना मुश्किल'
ईरान के इस प्रस्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वो ईरान के नए प्रस्ताव की जल्द ही जांच करेंगे, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि इसे स्वीकार करना मुश्किल है.
ट्रंप का मानना है कि ईरान को अपनी पिछली कार्रवाइयों के लिए और अधिक जवाबदेह होना चाहिए. फिलहाल पाकिस्तान के माध्यम से बातचीत जारी है, लेकिन समुद्री विवाद और ट्रंप के बयानों ने सुलह की राह में नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
'समुद्री डकैती' के बयान पर मचा बवाल
वहीं, शांति वार्ता के बीच दोनों देशों में तनाव तब बढ़ गया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई की तुलना समुद्री डकैती (Piracy) से कर दी. ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी बलों ने एक जहाज और उसका माल जब्त किया है और वो समुद्री लुटेरों की तरह हैं, लेकिन वे खेल नहीं रहे हैं. उन्होंने इन जब्ती को 'बहुत लाभदायक व्यवसाय' बताया. इस बयान पर ईरान ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अमेरिका पर "कानूनी समुद्री डकैती" करने का आरोप लगाया है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाही ने ट्रंप की टिप्पणी को गैरकानूनी आचरण का "सीधा स्वीकारोक्ति" बताया है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन को खारिज करने की अपील की है. तेहरान ने अपने तेल ले जा रहे दो टैंकरों, मेजेस्टिक एक्स और टिफनी की जब्ती को "ऊंचे समुद्र पर सशस्त्र डकैती" करार दिया है. ईरान का तर्क है कि यह वैश्विक समुद्री मानदंडों को कमजोर करता है.
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