अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की परमाणु वार्ता 26 फरवरी को जिनेवा में होगी. इसकी पुष्टि ओमान ने की, जो दोनों देशों के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने बताया कि इससे पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अप्रत्यक्ष वार्ताएं ओमान में हुई थीं और पिछले सप्ताह जिनेवा में भी बैठक हुई थी.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'ईरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है. हालिया वार्ताओं में व्यावहारिक प्रस्तावों का पर बातचीत आगे बढ़ी है और उत्साहजनक संकेत मिले हैं. हालांकि, हम अमेरिका की गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित परिदृश्य के लिए सभी जरूरी तैयारियां कर ली गई हैं.'
अमेरिकी प्रशासन की ओर से वार्ता को लेकर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने मध्य पूर्व में दशकों में सबसे बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाई है और ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायतें देने का दबाव बढ़ाया है. ओमान की घोषणा से कुछ समय पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह 26 फरवरी को जिनेवा में विशेष अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं.
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परमाणु मुद्दे का निकलेगा कूटनीतिक समाधान
उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दे पर कूटनीतिक समाधान की अच्छी संभावना अभी बनी हुई है. अराघची के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते का मसौदा कुछ दिनों में साझा किया जा सकता है. ईरान का कहना है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित है, जबकि अमेरिका और इजरायल ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को समर्थन के मुद्दे भी उठाना चाहते हैं. ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि यदि वार्ता विफल रही तो ईरान पर सीमित सैन्य हमले संभव हैं.
ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है. वहीं अमेरिका का कहना है कि हम ईरान को न तो परमाणु हथियार बनाने देंगे और न ही यूरेनियम का संवर्धन करने देंगे. अराघची ने कहा कि ताजा दौर की बातचीत में अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने की कोई शर्त नहीं रखी है और चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा शांतिपूर्ण कैसे रखा जाए, जिसके बदले प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है.
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तेहरान और मशहद में नए विरोध प्रदर्शन शुरू
इसी बीच, ईरान में सरकार विरोधी नए प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. तेहरान और मशहद में विश्वविद्यालयों के छात्र इस साल जनवरी में ईरानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई में जान गंवाने वाले प्रदर्शकारियों की याद में सड़कों पर उतरे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ को 'तानाशाह की मौत' जैसे नारे लगाने सुना गया. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पिछले प्रदर्शनों और कार्रवाई में कम से कम 7,015 लोगों की मौत हुई, जबकि ईरान सरकार ने 3,117 मौतों का आंकड़ा दिया है.
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