बस ईरान पर हमला करने ही वाले हैं ट्रंप! मिडिल ईस्ट पहुंचे अमेरिकी जंगी जहाज और युद्धपोत

यदि राष्ट्रपति ट्रंप तेहरान पर दबाव बढ़ाने का फैसला करते हैं तो मिडिल ईस्ट में विमानवाहक पोत की मौजूदगी वॉशिंगटन को कई सैन्य विकल्प देती है. इधर, ईरान ने चेताया है कि किसी भी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा.

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यूएस नेवी एयरक्राफ्ट यूएसएस अब्राहम लिंकन (Photo: US Navy) यूएस नेवी एयरक्राफ्ट यूएसएस अब्राहम लिंकन (Photo: US Navy)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:19 AM IST

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और वॉरशिप मिडिल ईस्ट में पहुंच चुका है. ऐसे में चर्चा है कि अमेरिका ईरान पर जल्द ही हमला करने वाला है.

अमेरिकी नेवी का अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के इलाके में पहुंचा. ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इंडो-पैसिफिक में चल रहे ऑपरेशन से हटाकर इन युद्धपोतों को भेजा गया है. इससे अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान पर हवाई हमलों का आदेश दे सकते हैं.

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परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप- 3 ने 19 जनवरी को मलक्का जलडमरूमध्य पार किया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि विमानवाहक पोत और इसका स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तैनात किया गया है.

ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी
दरअसल, ईरान में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और खामेनेई प्रशासन की उनपर कठोर कार्रवाई के बाद ट्रंप ने तेहरान को चेताया था. ट्रंप ने इस सैन्य जमावड़े को ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए देशव्यापी प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर दबाव बनाने से जोड़ा है.

पिछले सप्ताह ट्रंप ने कहा था कि जहाजों को सिर्फ एहतियात के तौर पर भेजा गया है. उन्होंने कहा, हमारा एक विशाल बेड़ा उस दिशा में जा रहा है. हो सकता है कि हमें उसका इस्तेमाल न करना पड़े. इस बयान से यह संकेत मिला कि शक्ति प्रदर्शन और हमलों की अनिश्चितता दोनों ही दबाव की रणनीति का हिस्सा हैं.

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टंप ने दी थी चेतावनी
इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी या उनकी हत्या की तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है. बाद में ट्रंप ने तत्काल कार्रवाई से पीछे हटते हुए कहा कि ईरान ने 800 से अधिक बंदियों की प्रस्तावित फांसी रोक दी है. हालांकि तेहरान ने इस दावे को पूरी तरह झूठ बताया था.

लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती ऐसे समय हुई है, जब पेंटागन इस इलाके में अन्य सैन्य संसाधन भेज रहा है, जिनमें लड़ाकू विमान और सैन्य मालवाहक उड़ानें हैं. इससे ईरान के आसपास अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ गई है.

यदि ट्रंप तेहरान पर दबाव बढ़ाने का फैसला करते हैं तो इस विमानवाहक पोत की मौजूदगी वॉशिंगटन को कई सैन्य विकल्प देती है. इधर, ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा.

अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप क्या है?
यह अमेरिकी नौसेना का एक पूरा युद्ध समूह है, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर मुख्य होता है. यह ग्रुप Carrier Strike Group 3 (CSG-3) का हिस्सा है, जिसमें Carrier Air Wing Nine (CVW-9) एम्बार्क है. ग्रुप का फ्लैगशिप अब्राहम लिंकन है. इसमें Destroyer Squadron 21 के जहाज शामिल हैं.

ग्रुप में कितने जहाज और पनडुब्बियां?
एयरक्राफ्ट कैरियर: 1 - यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72). यह न्यूक्लियर-पावर्ड है. 100000 टन से ज्यादा वजन. दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक.
गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (Arleigh Burke-class): 3-4 (जैसे USS Michael Murphy, USS Spruance, USS Frank E. Petersen Jr. ये एयर डिफेंस, एंटी-सबमरीन और लैंड अटैक के लिए हैं.
क्रूजर: कभी-कभी 1 (Ticonderoga-class), लेकिन वर्तमान में मुख्य रूप से डिस्ट्रॉयर्स.
पनडुब्बी: 1-2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (जैसे Virginia या Los Angeles-class). ये दुश्मन के जहाजों और सबमरीन्स को ट्रैक करती हैं. टोमाहॉक मिसाइलें दाग सकती हैं.
सपोर्ट जहाज: 1-2 (एम्युनिशन, ऑयलर और सप्लाई शिप जैसे USNS Cesar Chavez).

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