ईरान के साथ जारी युद्ध जितना लंबा खिंचता जा रहा है, डोनाल्ड ट्रंप को अपने देश अमेरिका में ही तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री और सीआईए प्रमुख लिओन पनेटा (Leon Panetta) ने कहा है कि ट्रंप इस समय दो पाटों के बीच फंसे हुए हैं, जहां से निकलना आसान नहीं है. ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' (The Guardian) से बातचीत में पनेटा ने कहा कि मिडिल ईस्ट का यह संकट काफी हद तक ट्रंप की नीतियों का परिणाम है.
उन्होंने बताया कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से यह जानती थीं कि ईरान स्ट्रेट आफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बाधित कर वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इस खतरे को नजरअंदाज किया गया. लिओन पनेटा ने कहा, 'यह समझना कोई मुश्किल बात नहीं थी कि अगर ईरान से युद्ध होगा, तो होर्मुज सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता है.' पनेटा के मुताबिक, मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि अमेरिका ने या तो ईरान की प्रतिक्रिया को कम आंका या यह मान लिया कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा.
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पूर्व सीआईए प्रमुख ने यह भी कहा कि शुरुआती सैन्य कार्रवाई से ईरान कमजोर नहीं हुआ, बल्कि उसका नेतृत्व और मजबूत होकर उभरा है. उन्होंने इशारा किया कि अब वहां ज्यादा कठोर रुख अपनाने वाला नेतृत्व सामने आया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है. जैसे-जैसे युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंच रहा है, अमेरिका के भीतर भी ट्रंप पर दबाव बढ़ता जा रहा है. ईंधन की बढ़ती कीमतें और अनिश्चितता के चलते जनता का समर्थन घट रहा है. एक सर्वे के मुताबिक, 59 प्रतिशत अमेरिकी ईरान पर हमलों का विरोध कर रहे हैं.
पनेटा ने कहा कि ट्रंप के सामने कोई आसान रास्ता नहीं है. युद्ध से पीछे हटना कमजोरी माना जा सकता है, जबकि इसे और बढ़ाना हालात को और बिगाड़ सकता है. उन्होंने साफ कहा कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदारी खुद ट्रंप की है. उन्होंने सहयोगी देशों के साथ समन्वय की कमी पर भी सवाल उठाए और चेतावनी दी कि इससे संकट और गहरा सकता है. इस बीच ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों पर हमला करता है, तो वह खाड़ी देशों के ऊर्जा और वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं.
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