ट्रंप ने एक महीने के लिए टाल दी चीन यात्रा... ईरान वॉर में बीजिंग को लाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स!

ईरान की लड़ाई में ट्रंप की सबसे प्रमुख चुनौतियों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए खुला रखना है. इसके लिए ट्रंप ने नाटो के अलावा चीन से भी मदद मांगी है. लेकिन चीन को दूसरे की लड़ाई में कूदने की कोई जल्दी नहीं है. अब ट्रंप दूसरा दांव चल रहे हैं.

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ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार अमेरिका जाने वाले हैं. (File Photo: ITG) ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार अमेरिका जाने वाले हैं. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST

ईरान की लड़ाई में चीन को लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीतिक दांव खेल रहे हैं. ट्रंप ने कई महीनों से प्रस्तावित चीन की यात्रा को टालना शुरू कर दिया है. पहले तो ट्रंप इस महीने के अंत में चीन की यात्रा पर जाने वाले थे, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि उनकी चीन यात्रा अब 6 सप्ताह बाद होगी. 

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मंगलवार को ओवल ऑफिस में आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह महीने के आखिर के बजाय, पांच या छह हफ़्तों में चीन जाएंगे.

उन्होंने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी यात्रा को 'रीसेट' करेंगे, हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया.

ट्रंप की चीन यात्रा को दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापार को लेकर हुई नाज़ुक सुलह को और मज़बूत करने के एक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन यह ईरान में चल रहे युद्ध को खत्म करने की उनकी कोशिशों में उलझकर रह गई है. 

चीन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या चाहते हैं ट्रंप

ट्रंप ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित और खुला रखने के लिए चीन सहित कई देशों से मदद मांगी है. उन्होंने कहा कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को अमेरिका का आभार मानना चाहिए क्योंकि अमेरिका ईरान पर हमलों से उनके तेल सप्लाई की रक्षा कर रहा है. ट्रंप ने आश्चर्य जताया कि चीन युद्धपोत भेजने के लिए उत्सुक नहीं है. ट्रंप ने सहयोगियों की आलोचना की कि वे मदद नहीं कर रहे, और चीन से भी युद्धपोत भेजने की अपील की, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया को कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा सप्लाई होता है. चीन ने ट्रंप के इस अनुरोध पर सीधा जवाब नहीं दिया है. बल्कि सभी पक्षों से सैन्य अभियान रोकने की बात कही है. 

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इसके बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी चीन यात्रा की योजनाएं अभी पक्की नहीं हैं; हालांकि मंगलवार को उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे सहयोगी देशों से मना किए जाने के बाद अब अमेरिका को किसी मदद की जरूरत नहीं है.

बता दें कि रविवार को 'फाइनेंशियल टाइम्स' के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे जानना चाहते हैं कि क्या बीजिंग मार्च के आखिर में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने में मदद करेगा.

सोमवार को उन्होंने पत्रकारों से कहा कि युद्ध की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने अपनी यात्रा को लगभग एक महीने के लिए टालने का अनुरोध किया है.

ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि मेरा यहां रहना जरूरी है. इसलिए हो सकता है कि हम इसे थोड़ा टाल दें."

ट्रंप के इस कदम पर अब चीन की प्रतिक्रिया देखनी दिलचस्प होगी. 

चीन बोला- गलत है रिपोर्ट

इस मुद्दे पर चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स के एक रिपोर्टर के सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने मंगलवार को कहा कि चीन ने इस बात पर गौर किया है कि अमेरिकी पक्ष ने मीडिया की उन गलत रिपोर्टों पर पहले ही सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दे दिया है. ये रिपोर्टें पूरी तरह से झूठी हैं और इस बात पर जोर दिया गया है कि यह यात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी नहीं है. लिन ने कहा कि चीन और अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर आपस में संपर्क बनाए रखा है.
 

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