अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एनर्जी, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर समेत पावर प्लांट्स पर हमले रोकने की समयसीमा को पांच दिनों बढ़ाने का ऐलान किया था, लेकिन इसके बावजूद ईरान के दो बड़े औद्योगिक शहरों खुर्रमशहर और इस्फ़हान में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात भारी हमले हुए. इन हमलों से ईरान का पावर ग्रिड और गैस सप्लाई नेटवर्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान पर हमले पहले की तरह जारी है.
दरअसल, ट्रंप ने सोमवार को दावा किया था कि अमेरिका एक सम्मानित ईरानी नेता से बातचीत कर रहा है और तेहरान डील के लिए उत्सुक है. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की डेडलाइन पांच दिन बढ़ा दी थी. ट्रंप ने कहा कि अगर डील हुई तो अमेरिका ईरान का संवर्धित यूरेनियम ले लेगा.
ट्रंप ने मीडिया से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने रविवार को एक ईरानी नेता से बातचीत की थी. उन्होंने ये नहीं बताया कि वह कौन थे, लेकिन कहा कि अमेरिका ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई से बात नहीं की है. ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया. ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने एक्स पर लिखा, 'अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. ये फेक न्यूज है, जिसका मकसद फाइनेंशियल और ऑयल मार्केट को प्रभावित करना है.'
ट्रंप की मोहलत के बावजूद ईरान पर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात ईरान के दो महत्वपूर्ण औद्योगिक शहरों- खुर्रमशहर और इस्फ़हान में जबरदस्त विस्फोट हुए. इन हमलों से ईरान के पावर ग्रिड और गैस सप्लाई नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ है. पाइपलाइन फटने से खुर्रमशहर के पावर स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई है.
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास के इलाकों में आग की लपटें देखी गईं.
कुवैत में बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त
ईरान अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में पड़ोसी देशों के नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहा है. इसी क्रम में ईरान ने मंगलवार को तड़के कुवैत पर मिसाइल दागीं. कुवैत के ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों को बीच में रोकने के दौरान गिरे मलबे और छर्रों से हाई-वोल्टेज बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे कई इलाकों में अंधेरा छा गया है.
उधर, टेनसी में एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध शुरू होने के पीछे की कहानी साझा की. उन्होंने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की ओर इशारा करते हुए कहा कि पीट, मुझे लगता है कि सबसे पहले आवाज उठाने वाले आप ही थे. आपने कहा था- चलो, इसे करते हैं.
ट्रंप ने हेगसेथ की तारीफ करते हुए कहा कि उनके दबाव के कारण ही ईरान अब बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है. हालांकि, ट्रंप ने ये भी दोहराया कि यदि समझौता नहीं हुआ तो वो ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट (obliterate) कर देंगे.
मध्यस्थता की कोशिशें तेज
इस तनाव के बीच तुर्की और मिस्र ने युद्ध रोकने के लिए सक्रिय मध्यस्थता शुरू कर दी है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी ने कहा कि उन्होंने ईरान को तनाव कम करने के स्पष्ट संदेश भेजे हैं.
सूत्रों के अनुसार, तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, ताकि ऊर्जा संकट को टाला जा सके. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी पुष्टि की है कि वो अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इन गुप्त वार्ताओं से अवगत हैं.
जारी रहेंगे हमले: इजरायल
वहीं, एक तरफ जहां अमेरिका सीजफायर की बात कर रहा है, जबकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि ईरान और लेबनान पर हमले जारी रहेंगे.
इजरायल ने तेहरान के बुनियादी ढांचे और लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया है. लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने लिटानी नदी पर बने पुलों के नष्ट होने को जमीनी आक्रमण की प्रस्तावना बताया है. लेबनान में अब तक 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
आपको बता दें कि ईरान अतीत में भी अमेरिका की ओर से कई गई ऐसी मांगों को ठुकराता रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, फिलहाल युद्ध के कारण बंद पड़ा है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि यदि उनके पावर स्टेशनों पर हमला हुआ तो वो पूरे क्षेत्र के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएंगे.
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