ईरान-अमेरिका में फिर परमाणु कार्यक्रम पर मंथन, यहां होने जा रही बड़ी मीटिंग

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर अगले हफ्ते जिनेवा में दूसरे दौर की बातचीत होगी. स्विट्जरलैंड सरकार ने इसकी पुष्टि की है. पिछले साल के युद्ध और राष्ट्रपति ट्रंप की 'गंभीर परिणाम' भुगतने की चेतावनी के बीच यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

Advertisement
अगले हफ्ते तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में होगी दूसरे दौर का वार्ता. (Photo- ITG) अगले हफ्ते तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में होगी दूसरे दौर का वार्ता. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • वाशिंगटन,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:14 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी है. अब जानकारी आ रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौरा की वार्ता अगले हफ्ते होगी. हालांकि, अभी इस वार्ता की सटीक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है.

स्विट्ज़रलैंड विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की वार्ता अगले हफ्ते जिनेवा में होगी. इस वार्ता की मेजबानी ओमान करेगा, जिसने 6 फरवरी को आयोजित अप्रत्यक्ष चर्चाओं के पहले दौर को भी सुगम बनाया था. हालांकि, स्विस मंत्रालय ने वार्ता की तारीखों का खुलासा नहीं किया है.

Advertisement

ट्रंप की चेतावनी

वहीं, पहले दौर की वार्ता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि उनके प्रशासन के साथ समझौता करने में विफल रहने पर बहुत ही भयावह परिणाम हो सकते हैं. पिछले साल जून में इसी तरह की वार्ताएं टूट गई थीं, इसके बाद इजरायल ने ईरान पर अटैक कर दिया. दोनों के बीच 12 दिनों तक भीषण संघर्ष चला, जिसमें अमेरिका ने ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी.

ट्रंप ने बार-बार ईरान को अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के लिए बल प्रयोग की धमकी दी है. इसके जवाब में ईरान का कहना है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह जवाबी हमला करेगा.

ट्रंप ने ईरान में हालिया राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई के लिए भी धमकी दी है. जबकि खाड़ी अरब देशों ने चेतावनी दी है कि कोई भी हमला क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील हो सकता है.

Advertisement

विमानवाहक पोत मिडिल ईस्ट रवाना

ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड कैरेबियन से मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है, जहां अमेरिका पहले से ही सैन्य संपत्तियां जमा कर चुका है. उन्होंने ये भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात होगी जो हो सकती है.

उधर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ के बीच हुई 6 फरवरी की अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी. इस वार्ता में पहली बार मिडिल ईस्ट के शीर्ष सैन्य कमांडर भी मौजूद थे.

ट्रंप प्रशासन का रुख है कि किसी भी समझौते के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाएगी. तेहरान ने इससे इनकार कर दिया है. ईरान ने दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसने अमेरिकी मांग से सहमत होने से इनकार कर दिया है.

आपको बता दें कि पिछले साल जून युद्ध से पहले ईरान 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था और आशंका थी वह जल्द ही परमाणु हथियार बना सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement