अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव जारी है, जिसने खाड़ी के हालात को और गंभीर बना दिया है. अमेरिकी नौसेना के एक्शन से अब प्रेशर पॉइंट यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर ईरान की पकड़ कमजोर होती दिख रही है. इसके बाद अब ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके हितों को नुकसान पहुंचा तो वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को रोक सकता है.
मतलब साफ है कि Strait of Hormuz पर कंट्रोल बनाए रखने के लिए ईरान किसी भी हद तक जा सकता है.
अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बन गया है. यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.
दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 5वां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए यहां होने वाली हर हलचल का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है.
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा है. दुनिया का लगभग 20% तेल और 25% प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरती है, जिसमें सऊदी अरब, इराक, UAE और ईरान जैसे देशों का बड़ा हिस्सा शामिल है.
ईरान के लिए ये न केवल आर्थिक जीवनरेखा है, बल्कि नौसेना वर्चस्व का प्रमुख हथियार भी. ईरान की तटीय मिसाइलें, ड्रोन और छोटी तेज नौकाएं इस क्षेत्र में हमेशा तैनात रहती हैं और उसकी नौसेना की क्षमता को बढ़ावा देती हैं.
... तो चरमरा जाएगा ईरान का वर्चस्व
अगर ईरान होर्मुज पर नियंत्रण खो देता है तो उसकी नौसेना वर्चस्व पूरी तरह चरमरा जाएगा. अमेरिका के और ज़्यादा विध्वंसक हवाई हमलों से ईरानी नौसैनिक संपत्तियां नष्ट हो सकती हैं, जैसा 1980-88 टैंकर युद्ध में हुआ. इससे ईरान का तेल निर्यात ठप हो जाएगा, अर्थव्यवस्था ध्वस्त होगी और उसके प्रॉक्सी समूह कमजोर पड़ेंगे. जिसका मतलब साफ है कि ईरान के लिए इसे बचाए रखना अपने वजूद को बचाने के बराबर है.
ईरान के लिए होर्मुज खोना नौसेना की सुपरमेसी का अंत होगा. यानी इसको खोने का मतलब है कि ईरान इस पूरे इलाके में अपने वजूद को ही खो देगा.
सुमित चौधरी