जासूसी के आरोप में रूस की बड़ी कार्रवाई, ब्रिटिश राजनयिक को देश से निकाला

रूस और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक तनाव खुलकर सामने आ गया है. मॉस्को ने जासूसी के आरोपों के तहत एक ब्रिटिश राजनयिक को देश से बाहर निकालने का फैसला लिया है. उसे देश छोड़ने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है.

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मॉस्को ने ब्रिटिश दूतावास के अधिकारी को 2 हफ्ते में देश छोड़ने का आदेश दिया. (File Photo: ITG) मॉस्को ने ब्रिटिश दूतावास के अधिकारी को 2 हफ्ते में देश छोड़ने का आदेश दिया. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • मॉस्को,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:35 PM IST

रूस ने जासूसी और गलत जानकारी देने के आरोपों के बीच एक ब्रिटिश राजनयिक को देश से निष्कासित कर दिया है. मॉस्को ने उसे दो हफ्तों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है. इस कार्रवाई के साथ ही रूस और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है.

फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने सोमवार को जानकारी दी कि ब्रिटिश राजनयिक की मान्यता रद्द कर दी गई है. उसे दो हफ्तों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है. FSB के मुताबिक, जिस ब्रिटिश राजनयिक पर कार्रवाई की गई है, उसकी पहचान जानसे वैन रेंसबर्ग के रूप में हुई है. 

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एजेंसी ने साफ कहा कि उनकी मान्यता खत्म कर दी गई है और तय समय सीमा के भीतर उसे रूस छोड़ना होगा. इस पूरे घटनाक्रम के बीच रूस के विदेश मंत्रालय ने भी सख्त रुख अपनाया. इस मामले में मॉस्को स्थित ब्रिटिश चार्ज डी'अफेयर्स डानाए ढोलकिया को मंत्रालय में तलब किया गया.

उन्हें एक औपचारिक विरोध पत्र सौंपा गया. यह कदम तब उठाया गया जब रूसी अधिकारियों को पता चला कि ब्रिटिश दूतावास के एक कर्मचारी ने देश में प्रवेश के दौरान अपने बारे में जानबूझकर गलत जानकारी दी थी.जांच में सामने आया कि अधिकारी ने अपने वीजा आवेदन में झूठी जानकारी दी.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये रूसी कानून का उल्लंघन है. यह कार्रवाई 1961 के वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 9 के तहत की गई है. इसके तहत किसी भी राजनयिक की मान्यता खत्म की जा सकती है. FSB ने जांच का हवाला देते हुए कहा कि ब्रिटिश दूतावास में खुफिया एजेंसी की अघोषित मौजूदगी का पता चला है.

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एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान संबंधित अधिकारी की खुफिया और विध्वंसक गतिविधियों में संलिप्तता के संकेत भी मिले, जिससे रूस की सुरक्षा को खतरा हो सकता था. यह पहला मामला नहीं है जब रूस ने ऐसी कार्रवाई की है. इसी साल जनवरी में भी ब्रिटिश दूतावास के एक सचिव को देश से निकाला था.

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