नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनाव में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों में से केवल पुष्पकमल दहल प्रचंड ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की लहर के बीच अपनी सीट जीतने में कामयाब रहे. अन्य सभी पुराने नेताओं को इस चुनाव में मुंह की खानी पड़ी. आरएसपी ने कल शाम 5:30 बजे तक घोषित 156 सीटों में से 120 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत की ओर अग्रसर है.
इस हिमालयी देश में हुए आम चुनाव में आरएसपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बलेंद्र शाह (बालेन) ने सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष और चार बार के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में भारी अंतर से हराया, जो वर्षों से उनका और उनकी पार्टी का गढ़ रहा था.
डेविड बनाम गोलियत की लड़ाई में, 35 वर्षीय बालेन शाह ने पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत के उस निर्वाचन क्षेत्र में 74 वर्षीय ओली के 18,734 वोटों के मुकाबले 68,348 वोट हासिल किए, जहां पूर्व प्रधानमंत्री वर्षों से अपराजित रहे थे. पिछले साल भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर 'GEN-Z' आंदोलन के बाद 9 सितंबर को केपी शर्मा ओली को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था. नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया, जिन्होंने घोषणा की थी कि 5 मार्च, 2026 को देश में आम चुनाव होंगे.
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बालेन शाह ने पूर्व PM ओली को उनके गढ़ में हराया
बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को चुनौती देते हुए झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र को चुना, जिससे यह पुराने रूढ़िवादी नेताओं और उम्मीद के नए चेहरे के बीच सीधा मुकाबला बन गया. पुष्पकमल दहल प्रचंड (71), जो हर चुनाव में एक नया निर्वाचन क्षेत्र चुनने के लिए जाने जाते हैं, इस बार रुकुम पूर्व से मैदान में थे. प्रचंड ने 2007 में रोल्पा-2 और काठमांडू-10 से जीत हासिल की थी, फिर 2013 में वह काठमांडू-10 से हार गए, लेकिन सिराहा-5 से जीत गए. उन्होंने 2017 में चितवन-3 से जीत हासिल की थी और 2022 के चुनाव से गोरखा-2 सीट से चुनाव लड़ने लगे.
नेपाल के पूर्व सांसद सुनील बाबू पंत ने कहा, 'प्रचंडा ने सुरक्षित क्षेत्र की तलाश में बार-बार अपना निर्वाचन क्षेत्र बदला और इस बार उन्होंने सुदूर रुकुम पूर्व से चुनाव लड़ा, जो पूर्व माओवादी पार्टी के गढ़ों में से एक था. इस बार पूर्व माओवादी गुरिल्ला कमांडर ने न केवल अपना निर्वाचन क्षेत्र बदला है, बल्कि पार्टी का नाम भी बदलकर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी कर दिया है.' लेकिन सिर्फ निर्वाचन क्षेत्र बदलने से ही प्रचंड को फायदा नहीं हुआ. चुनाव से कुछ महीने पहले, उन्होंने सीपीएन-माओवादी केंद्र को भंग कर दिया और दो दर्जन छोटी पार्टियों का विलय करके पार्टी का नाम बदलकर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) कर दिया. वह अब नई पार्टी के सह-समन्वयक हैं.
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पूर्व PM माधव नेपाल भी बालेन की पार्टी के से हारे
एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल (73), जो एनसीपी के सह-समन्वयक हैं, रौतहट-1 से आरएसपी के राजेश कुमार चौधरी से हार गए. प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री,(71) बाबूराम भट्टराई ने गोरखा-2 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया. हालांकि, केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के दिग्गज ही नहीं हारे. आरएसपी ने नेपाल की दो बड़ी पार्टियों, नेपाली कांग्रेस (NC) और सीपीएन-यूएमएल के कई गढ़ों, क्षेत्रों और प्रमुख गढ़ों को ध्वस्त कर दिया.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सीपीएन-यूएमएल के लगभग 11 पदाधिकारियों को आरएसपी उम्मीदवारों के हाथों अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा, जबकि एनसी के आधे दर्जन से अधिक दिग्गज नेता भी चुनाव हार गए. सितंबर, 2025 में ओली सरकार के पतन के बाद, चुनाव अभियान से पहले और उसके दौरान जेनरेशन जेड द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, सुशासन, भाई-भतीजावाद का अंत, राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत परिवर्तन आदि थे.
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नेपाल समाचारपत्र की पत्रकार सरस्वती कर्माचार्य के मुताबिक, 'पारंपरिक पार्टियां उन मतदाताओं को समझाने में विफल रहीं, जिनके लिए प्रमुख मुद्दों में भ्रष्टाचार से लड़ना और भाई-भतीजावाद का अंत करना, साथ ही हिमालयी राष्ट्र के राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव शामिल थे. पार्टियों के साथ-साथ, उन पुराने नेताओं का राजनीतिक भविष्य भी डूब गया, जिन्होंने पिछले दो दशकों में नेपाल की राजनीति को म्यूजिकल चेयर खे बना दिया था. इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि जनता ने उन्हें नकार दिया.'
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