सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचे राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिकी इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पब्लिक के लिए खुली है, लेकिन एक राष्ट्रपति का यहां पहुंचना विवादास्पद हो सकता है. क्योंकि कई संगठन मानते हैं कि ये न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है.

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ट्रंप जन्मजात नागरिकता के मुद्दे पर चल रही बहस सुनने गए थे. (File Photo: Reuters) ट्रंप जन्मजात नागरिकता के मुद्दे पर चल रही बहस सुनने गए थे. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:52 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति बुधवार को सुबह 10 (अमेरिकी समयानुसार) सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप पहले कतार में बैठे. इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के पहले हेड ऑफ द स्टेट बन गए हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की मौखिक दलीलें सुनीं. 

ट्रंप का ये मामला उनके एक कार्यकारी आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में बैठने की व्यवस्था आम जनता के लिए खुली है, लेकिन राष्ट्रपति की उपस्थिति विवादास्पद है, क्योंकि इसे न्यायाधीशों पर दबाव डालने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. अमेरिका के संविधान में सुप्रीम कोर्ट को व्हाइट हाउस पर एक स्वतंत्र नियंत्रण के तौर पर डिजाइन किया गया है. 

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ट्रंप ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने खुद वहां जाने की योजना बनाई है क्योंकि वे इतने लंबे समय से इस केस के बारे में सुनते आ रहे हैं. 

किस केस को सुनने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे ट्रंप

ये केस 'बारबरा बनाम ट्रंप' है. यह अमेरिका में जन्मजात नागरिकता से जुड़ा है. ये मामला एक ऐसे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के इर्द-गिर्द घूमता है, जिस पर ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन दस्तखत किए थे. इस ऑर्डर का मकसद उन बच्चों को अमेरिका की जन्मजात नागरिकता देने से रोकना था, जिनका जन्म अमेरिका में ऐसे माता-पिता से हुआ था जो देश में या तो गैर-कानूनी तरीके से रह रहे थे या फिर अस्थायी तौर पर. 

यह ऑर्डर अभी तक लागू नहीं हो पाया है, क्योंकि कई निचली अदालतों ने तुरंत इसे असंवैधानिक करार दे दिया था. अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में रही है. 

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जन्मसिद्ध नागरिकता का कानूनी सिद्धांत के तहत अमेरिका या उसके किसी भी क्षेत्र में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति वहां का नागरिक बन जाता है. 1868 में 14वें संशोधन के पास होने के बाद से ही इस कानून की अलग अलग व्याख्याएं हुईं. ट्रंप के इस ऑर्डर के खिलाफ तुरंत कई मुकदमे दायर कर दिए गए थे. इनमें आप्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों और राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर मुकदमे भी शामिल थे. इसके परिणामस्वरूप निचली अदालतों के फैसलों ने इस ऑर्डर को लागू होने से रोक दिया. 

ट्रंप अपनी नीतियों के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत को शर्तों के साथ ही सही ठहराते हैं. 

ट्रंप के कई फैसले सुप्रीम कोर्ट में आए

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की कोई नीति देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने आई हो. सुप्रीम कोर्ट ने अकेले 2025 में ही उनके प्रशासन के कामों से जुड़े लगभग दो दर्जन आपातकालीन मामलों पर विचार किया. हालांकि ज़्यादातर मामलों में उनके पक्ष में ही फ़ैसला सुनाया. लेकिन टैरिफ लगाने का मसला ऐसा था जहां ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा और कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला दिया और टैरिफ लगाने के उनके अधिकार को गलत माना. 

लेकिन यह पहली बार है जब ट्रंप या कोई भी पद पर आसीन राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट में मौखिक दलीलों के दौरान लोगों के बीच मौजूद रहे हैं. 

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अमेरिका में राष्ट्रपतियों ने कभी-कभी सीधे तौर पर अदालत से बातचीत की है, जिसमें उनके द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह या स्वागत कार्यक्रमों में शामिल होना शामिल है. 

अमेरिकन बार एसोसिएशन के अनुसार कम से कम आठ राष्ट्रपतियों ने अपने वकील के करियर के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने मुकदमों पर बहस की है. लेकिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि अब तक किसी भी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस से सिर्फ सुनवाई सुनने के लिए अदालत का सफर नहीं किया था.

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