ईरान और भारत पर क्यों अचानक भड़क गए पाकिस्तानी? बोले- दुश्मन का दोस्त भी दुश्मन

अजरबैजान और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से तनाव की स्थिति पैदा हुई है. अजरबैजान ने ईरानी ट्रकों को टारगेट करते हुए फाइन लगाए हैं और इन ट्रकों के ड्राइवर्स को अरेस्ट किया है. वही ईरान ने अजरबैजान के साथ लगे बॉर्डर पर मिलिट्री फोर्स लगा दी है. ये मसला इतना गंभीर हो गया कि दोनों देशों के बड़े राजनेता इस मुद्दे को लेकर बयान दे रहे हैं. हालांकि अजरबैजान और ईरान के इस विवाद को लेकर पाकिस्तानी सोशल मीडिया काफी एक्टिव हो गए हैं. ये यूजर्स सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को ट्रेंड कराते हुए ईरान और भारत की आलोचना कर रहे हैं.

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ईरान का ध्वज फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स ईरान का ध्वज फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 01 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 1:21 PM IST
  • ईरान-अजरबैजान का विवाद पाकिस्तान में हुआ ट्रेंड
  • पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स ने भारत-ईरान को घेरा

अजरबैजान और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से तनाव की स्थिति पैदा हुई है. अजरबैजान ने ईरानी ट्रकों को टारगेट करते हुए जुर्माना लगाया और इन ट्रकों के ड्राइवर्स को अरेस्ट किया है. वहीं, ईरान ने भी अजरबैजान के साथ लगे बॉर्डर पर मिलिट्री फोर्स लगा दी है. ये मसला इतना गंभीर हो गया कि दोनों देशों के बड़े राजनेता इस मुद्दे को लेकर बयान दे रहे हैं. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उन्हें ईरान के नए प्रशासन से उन्हें उम्मीद है कि इन घटनाओं को लेकर अकुंश लगेगा. हालांकि, अजरबैजान और ईरान के इस विवाद को लेकर पाकिस्तानी सोशल मीडिया काफी एक्टिव हो गए हैं. ये यूजर्स सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को ट्रेंड कराते हुए ईरान और भारत की आलोचना कर रहे हैं. अजरबैजान के अलावा, पाकिस्तानी ईरान को उसकी भारत से दोस्ती को लेकर भी निशाने पर ले रहे हैं. 

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पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर छाया रहा ये मुद्दा 

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि जब तक ईरान है, मुसलमानों को किसी दुश्मन की जरूरत नहीं है. ईरान ने हमेशा से ही मुस्लिमों को बांटने की कोशिश की है. ईरान मिडिल ईस्ट में दखलअंदाजी देता रहा है और ईरान ने पाकिस्तान को छोड़कर हमेशा भारत का साथ दिया है. ईरान को लगभग हर मुस्लिम देश से दिक्कते हैं. 

एक और शख्स ने लिखा कि शिया समुदाय वाला ईरान शिया समुदाय वाले अजरबैजान को छोड़कर अर्मेनिया जैसे देश को सपोर्ट कर रहा है जहां ईसाई समुदाय का दबदबा है. ईरान अब अपनी नापाक गतिविधियों के लिए जमीन तलाश रहा है और अपने दुश्मनों की संख्या बढ़ा रहा है क्योंकि अफगानिस्तान में हार के बाद उसका सपना चकनाचूर हो चुका है. 

इसके अलावा एक और ट्वीट में लिखा था कि पॉलिसी हमेशा साफ होनी चाहिए. दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है और दुश्मन का दोस्त दुश्मन होता है. ईरान भारत का दोस्त है और हमारा दुश्मन है. ईरान में यहूदियों के लिए अधिकार हैं लेकिन सुन्नी मुस्लिमों के लिए ऐसा नहीं है. पाकिस्तान के साथ ईरान का पिछले कुछ समय से व्यवहार ठीक नहीं रहा है. 

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आरएफई/आरएल की रिपोर्ट के अनुसार, जिन ट्रकों को लेकर बात हो रही है, वे अर्मेनिया शहर कपान और गोरिस के बीच से होते हुए गुजर रहे थे जो आंशिक रूप से पिछले साल नागोर्नो-कराबाख युद्ध के बाद अजरबैजान को सौंपे गए क्षेत्र से होकर गुजरता है. इस हाइवे पर रूस सैनिकों की गश्त लगती है और ये हाइवे आर्मेनिया के लिए ईरान जाने का एकमात्र लिंक है. इस महीने के शुरुआत में ही अजरबैजान की फोर्स ने ईरान के इन कमर्शियल ट्रकों की जांच करनी और टैक्स लगाना शुरू किया था और कई ईरान के ट्रक ड्राइवर्स को अरेस्ट भी किया गया था. 

ईरान के ट्रकों को लेकर अजरबैजान के राष्ट्रपति ने भी दिया बयान 

अजरबैजान के अधिकारियों ने कहा है कि कानून के मुताबिक, सभी विदेशी वाहनों को इस देश में घुसने के लिए सड़क और ट्रांसिट फीस देनी पड़ती है जो ईरान के ट्रक नहीं चुका रहे थे. अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भी इस बात को लेकर रोष जताया था और कहा था कि आखिर ईरान इस क्षेत्र में मौजूद सिर्फ 25 हजार निवासियों वाले क्षेत्र में व्यापार को लेकर ईरान इतना जोर क्यों दे रहा है? अनादोलु एजेंसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि 'क्या ये बाजार इतना महत्वपूर्ण है? क्या ये व्यापार वाकई इतना महत्वपूर्ण है कि आप उस देश की बेइज्जती करने को तैयार हैं जिसे आप दोस्त मानते हैं?'

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