ट्रेड, टैरिफ और... अमेरिका की 'गुड बुक्स' में लौटने के लिए पाकिस्तान ने क्या-क्या किया?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से जोड़ने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और लॉबिंग मुहिम शुरू की है. वाशिंगटन स्थित लॉबिंग फर्म के जरिए पाकिस्तान ने व्यापार, निवेश और सुरक्षा जैसे मोर्चों पर अमेरिका को लुभाने के लिए एक 'ट्रांजैक्शनल' ऑफर पेश किया है.

Advertisement
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ नए सिरे से रिश्ता बनाया. (Photo: X) ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ नए सिरे से रिश्ता बनाया. (Photo: X)

रोहित शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:19 AM IST

पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के चार दिन बाद 14 मई 2025 को अमेरिका के साथ अपने संबंधों को सुधारने के लिए एक औपचारिक कोशिश शुरू की. पूर्व अमेरिकी राजदूत और 'स्क्वायर पैटन बॉग्स' के सलाहकार पॉल डब्ल्यू जोन्स ने अमेरिकी विदेश विभाग की सीनियर अधिकारी एलिजाबेथ के. हॉर्स्ट को एक ईमेल भेजा. इस ईमेल के साथ 'ए रिन्यूड पाकिस्तान-यूनाइटेड स्टेट्स रिलेशनशिप' नामक एक नीतिगत दस्तावेज अटैच था, जिसमें पाकिस्तान को आर्थिक, सुरक्षा और भू-राजनीतिक भागीदार के रूप में पेश किया गया. 

Advertisement

पाकिस्तान ने इस मुहिम के जरिए एफएटीएफ (FATF) संबंधी चिंताओं को दूर करने और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस यात्रा का बंदोबस्त करने की कोशिश की.

इस दौरान पाकिस्तान ने अमेरिकी निर्यात बढ़ाने, टैरिफ कम करने और खनिज संसाधनों में सहयोग का प्रस्ताव रखा. जोन्स ने साफ किया कि उनकी फर्म विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के तहत पाकिस्तान सरकार की एक रजिस्टर्ड एजेंट के रूप में पारदर्शी तरीके से काम कर रही है.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तानी कनेक्शन पड़ा भारी, T20 वर्ल्ड कप के ल‍िए इस ख‍िलाड़ी को न‍हीं मिला भारत का VISA

लॉबिंग के पीछे के खास चेहरे

इस पूरी प्रक्रिया में पॉल डब्ल्यू जोन्स ने एक विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभाई. उन्होंने विदेश विभाग के साथ संपर्क साधते हुए प्रस्ताव पर फीडबैक मांगा और एरिक मायर्स जैसे अनुभवी राजनयिकों के साथ मीटिंग का सुझाव दिया. यह दर्शाता है कि पाकिस्तान को इस बात का एहसास था कि अमेरिका के साथ उसके संबंधों को भारत-अमेरिका रिश्तों और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के नजरिए से देखा जाएगा. एलिजाबेथ हॉर्स्ट, जिन्हें यह ईमेल भेजा गया था, श्रीलंका में राजदूत रहते हुए आर्थिक संकट और चीन से जुड़े वित्त पोषण जैसे मुद्दों को करीब से देख चुकी थीं.

Advertisement

FATF की ग्रे लिस्ट का डर

ईमेल में जोन्स ने एफएटीएफ (FATF) पर अलग से चर्चा की गुजारिश किया, जो पाकिस्तान की आतंकी वित्त पोषण की जांच और वैश्विक वित्त तक पहुंच को लेकर उसकी घबराहट को उजागर करता है. मई 2025 में ही भारत ने भी एक इंटरनेशनल कैंपेन चलाकर पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन के सबूत एफएटीएफ को सौंपने की तैयारी की थी, जिससे उसे फिर से ग्रे लिस्ट में डाला जा सके. पाकिस्तान के लिए एफएटीएफ की पाबंदियों से बचना और अपनी इंटरनेशनल इमेज सुधारना उसकी वॉशिंगटन रणनीति की प्राथमिकता बनी रही.

खनिज और निवेश का लुभावना ऑफर

पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने बेहद व्यावसायिक प्रस्ताव रखा. उसने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करने और अमेरिकी निर्यात को ज्यादा खरीदने का वादा किया. सबसे अहम बात यह थी कि उसने अमेरिका को 'क्रिटिकल मिनरल एग्रीमेंट' का प्रस्ताव दिया. पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके पास तांबा, लिथियम, कोबाल्ट, निकल और रेयर अर्थ्स जैसे खरबों डॉलर के संसाधन हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं. एसआईएफसी (SIFC) के जरिए अमेरिकी कंपनियों को फास्ट-ट्रैक एक्सेस देने की बात भी कही गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख संयुक्त रूप से करते हैं.

यह भी पढ़ें: 'चीन-पाकिस्तान ने सेना खड़ी कर ली...', ड्रोन-मिसाइल फोर्स की जरूरत को लेकर बोले आर्मी चीफ

Advertisement

सुरक्षा सहयोग और भू-राजनीतिक तर्क

सुरक्षा के मोर्चे पर पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी भूमिका को दोहराया. उसने एब्बी गेट बमबारी के पीछे के आईएसआईएस (ISIS) ऑपरेटिव की गिरफ्तारी और अफगानिस्तान में छूटे हुए अमेरिकी हथियारों को वापस पाने में मदद की पेशकश की. इसके साथ ही, पाकिस्तान ने तर्क दिया कि चीन के साथ उसके संबंध भौगोलिक हैं और वे अमेरिका के साथ संबंधों में बाधा नहीं बनने चाहिए. उसने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका के मजबूत रिश्तों का असर यूएस-पाकिस्तान संबंधों पर नहीं पड़ना चाहिए.

यह भी पढ़ें: अमेरिका-पाकिस्तान में क्या खिचड़ी पक रही? आज ट्रंप से वन-टू-वन होगी शहबाज शरीफ की मुलाकात

लॉबिंग से व्हाइट हाउस तक का सफर

यह मुहिम महज कागजों तक सीमित नहीं रही. ईमेल के कुछ ही हफ्तों बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने 18 जून को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इसके तुरंत बाद खनिज और तेल सहयोग की घोषणाएं की गईं. वॉशिंगटन के लिए यह जुड़ाव इस सोच को दर्शाता है कि पाकिस्तान में सेना ही वह संस्थान है, जो रणनीतिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम है. पाकिस्तान के लिए यह 'ऑपरेशन सिंदूर' से लेकर व्हाइट हाउस तक की एक सोची-समझी यात्रा थी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement