पाकिस्तान सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे कासिम खान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में दिए गए अपने भाषण के जरिए देश के जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेस प्लस (GSP Plus) दर्जे को कमजोर करने की कोशिश की है. इस दर्जे के तहत पाकिस्तान को निर्यात पर कम टैरिफ का लाभ मिलता है. फेडरल इंफॉर्मेशन मिनिस्टर अत्ताउल्लाह तरार, पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी और सिंध के सूचना मंत्री शारजील मेमन ने कासिम और पीटीआई नेता जुल्फी बुखारी की आलोचना करते हुए इसे 'सोची-समझी साजिश' बताया, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान का जीएसपी प्लस दर्जा छीनना है.
कासिम खान ने बुधवार को यूएनएचआरसी के 61वें सत्र में अपने संबोधन में इस अंतरराष्ट्रीय संस्था से अपील की कि वह पाकिस्तान सरकार पर उनके पिता की तत्काल रिहाई के लिए दबाव डाले. उन्होंने कहा, 'हम इस संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अनुरोध करते हैं कि वह पाकिस्तान से इमरान खान के खिलाफ उत्पीड़न को तुरंत समाप्त करने को कहे. सरकार को संयुक्त राष्ट्र वर्किंग ग्रुप की राय का पालन करते हुए उन्हें रिहा करना चाहिए.' मंत्रियों ने आरोप लगाया कि कासिम और उनके सहयोगियों का मकसद पाकिस्तान के जीएसपी प्लस दर्जे को खत्म करना है. उन्होंने दावा किया कि 'यह पाकिस्तान विरोधी समूह यूरोपीय संघ में इजरायली लॉबी और प्रतिबंधित बीएलए (BLA) से जुड़े तत्वों के साथ मिलकर काम कर रहा है.'
यह भी पढ़ें: तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास के पास जोरदार धमाके, कर्मचारियों और स्टाफ में दहशत
मंत्रियों ने कहा कि जीएसपी प्लस दर्जा मिलने के बाद पाकिस्तान के निर्यात में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे कपड़ा उद्योग को बड़ा फायदा हुआ और हजारों नौकरियां पैदा हुई हैं. मंत्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि पीटीआई अपने राजनीतिक हितों के लिए जनता की आजीविका छीनने की कोशिश कर रही है. मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मरयम नवाज को पीटीआई सरकार के दौरान उनके पिता नवाज शरीफ के सामने गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, पीटीआई ने सरकार के आरोपों को खारिज कर दिया है.
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रवक्ता शेख वकास अकरम ने कहा कि न तो कासिम और न ही जुल्फी बुखारी ने ऐसा कोई बयान दिया है जिससे पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचे. उन्होंने कहा कि कासिम का भाषण लाइव प्रसारित हुआ था और उसमें जीएसपी प्लस के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा गया. यूरोपीय संघ के अनुसार, जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेस प्लस एक स्पेशल इंसेंटिव स्कीम है, जो विकासशील देशों को 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट और गवर्नेंस' को बढ़ावा देने के बदले उनके दो-तिहाई निर्यात उत्पादों पर आयात शुल्क में छूट प्रदान करती है.
aajtak.in