सरकार ने पाकिस्तान से आने वाले डिजीटल कंटेंट पर रोक लगाने के लिए एडवाइजरी जारी की थी, बावजूद इसके पाकिस्तानी ड्रामे, लाइफस्टाइल व्लॉग, पॉलिटिकल ब्रॉडकास्टिंग और यहां तक कि सेना से जुड़े प्रोपेगेंडा भी अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर भारत के लोगों के लिए अब भी उपलब्ध है.
पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की थी. इसमें भारत में काम कर रहे OTT प्लेटफॉर्म्स, मीडिया-स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजीटल माध्यमों को निर्देश दिया गया था कि वो पाकिस्तान से आने वाली वेब सीरीज, फिल्में, गाने, पॉडकास्ट और अन्य स्ट्रीमिंग कंटेंट को बंद करें.
हालांकि, इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम के विश्लेषण के मुताबिक, इस एडवाइजरी का पालन हर जगह एक जैसा नहीं हुआ है. एडवाइजरी सब जगह ठीक से लागू ही नहीं हो पाई है.
ऐसा ही एक पाकिस्तान आधारित OTT प्लेटफॉर्म ARY Digital है. पाकिस्तान के इस ब्रॉडकास्टर का यूट्यूब चैनल भारत में 'पब्लिक ऑर्डर' के आधार पर ब्लॉक है, वहीं उसकी आधिकारिक वेबसाइट पूरी तरह से भारत में खुल रही है. वेबसाइट पर वही ड्रामा कंटेंट मौजूद है जो यूट्यूब पर ब्लॉक है. इस कंटेंट को पेड सब्सक्रिप्शन के जरिए भारतीय यूजर्स देख भी रहे हैं.
इसी तरह का पैटर्न 'Har Pal Geo' में भी दिखता है, जो Geo Media Group के तहत आता है. Geo News और उससे जुड़े यूट्यूब चैनल भारत में ब्लॉक हैं, लेकिन प्लेटफॉर्म की वेबसाइट पर पाकिस्तानी सीरियल बिना किसी रोक-टोक के स्ट्रीम हो रहे हैं. यानी पाकिस्तान से यह कंटेंट भारतीय दर्शकों तक पहुंच रहा है.
इंडिया टुडे के विश्लेषण में कम से कम 15 ऐसे यूट्यूब चैनल सामने आए हैं जो पाकिस्तानी ड्रामा कंटेंट स्ट्रीम कर रहे हैं और उससे कमाई भी कर रहे हैं. ये सभी भारत में उपलब्ध हैं. इसके अलावा पाकिस्तान के पांच लाइफस्टाइल और व्लॉग चैनल, जिनके कुल फॉलोअर्स 1.8 करोड़ से ज्यादा हैं, अब भी भारतीय दर्शकों तक पहुंच रहे हैं.
यह खामी सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं है. पाकिस्तान से जुड़े तीन पॉडकास्ट, जिनमें राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर बात होती है, वो भी एडवाइजरी के बावजूद भारत में एक्सेस किए जा सकते हैं.
वहीं दूसरी तरफ, भारतीय दर्शकों में लोकप्रिय कई पाकिस्तानी एक्टर्स और सिंगर्स के इंस्टाग्राम अकाउंट्स ब्लॉक हैं, जिससे यह साफ होता है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई चुनिंदा तरीके से हो रही है. लेकिन उनका पूरा कंटेंट इकोसिस्टम अब भी बना हुआ है. कम से कम चार पाकिस्तान आधारित डिजिटल क्रिएटर्स, जिनके कुल फॉलोअर्स 1.4 करोड़ से ज्यादा हैं, भारत में अब भी आसानी से देखे जा रहे हैं और इसका फायदा उठा रहे हैं.
भारत में सिर्फ पाकिस्तान के सांस्कृतिक या मनोरंजन से जुड़े कंटेंट ही नहीं उपलब्ध है बल्कि इंडिया टुडे के विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि भारत विरोधी आवाजें भी बड़े डिजीटल प्लेटफॉर्म्स पर अब भी मौजूद हैं.
एक उदाहरण Radio Pakistan का है, जो पाकिस्तान का सरकारी रेडियो ब्रॉडकास्टर है. इसका आधिकारिक यूट्यूब चैनल भारत में अब भी खुल रहा है. पिछले साल इस चैनल पर मुशाल हुसैन मलिक का इंटरव्यू ब्रॉडकास्ट किया गया था. मुशाल मलिक भारत की जेल में बंद उम्रकैद की सजा काट रहे कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक की पत्नी हैं.
जहां कुछ प्लेटफॉर्म्स पर Radio Pakistan की मौजूदगी कम की गई है, वहीं इसका आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल अब भी एक्टिव है और भारतीय यूजर्स इसे आसानी से एक्सेस कर पा रहे हैं. हालांकि, एक्स और फेसबुक पर Radio Pakistan ब्लॉक है.
यह खामी रणनीतिक सूचना (Strategic Information) के क्षेत्र में भी पाई गई है. पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग DG ISPR, जो सरकारी मिलिट्री प्रोपेगेंडा का प्रमुख जरिया मानी जाती है, भारत में बिना किसी रोक के अपना आधिकारिक एक्स हैंडल चला रही है. इस अकाउंट पर लंबे समय से भारत की सुरक्षा हितों के खिलाफ नैरेटिव फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, बावजूद इसके, इस पर सख्ती नहीं दिखी.
इंडिया टुडे को फेसबुक पर पाकिस्तानी सेना से जुड़े कई पेज और ग्रुप भी दिखे हैं, जिनमें 'Public Defense Information 🇵🇰' और Pak Army शामिल हैं. ये पेज लगातार पाकिस्तान का मिलिट्री प्रोपेगेंडा और स्ट्रैटेजिक मैसेज फैला रहे हैं.
ये पेज सिर्फ पाकिस्तान के सरकारी संस्थानों से जुड़ा प्रोपेगेंडा नहीं फैला रहे बल्कि आतंकवादी संगठनों से संबंधित कंटेंट भी फैला रहे हैं. लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ब्लॉग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, खासकर उसके प्रॉक्सी संगठन The Resistance Front (TRF) से जुड़े प्लेटफॉर्म्स भी भारत में एक्सेस किए जा सकते हैं. ये प्लेटफॉर्म्स अब भी चरमपंथी विचारधारा फैलाने वाला कंटेंट प्रकाशित कर रहे हैं.
कुल मिलाकर, ये नतीजे दिखाते हैं कि एडवाइजरी को लागू करने में भारी गलतियां हुई हैं. यूट्यूब और इंस्टाग्राम के कुछ अकाउंट्स पर चुनिंदा तौर पर रोक लगाई गई है, लेकिन पाकिस्तान के सब्सक्रिप्शन वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म, राजनीतिक रूप से सेंसिटिव टीवी चैनल, सेना से जुड़े प्रोपेगेंडा के चैनल्स और कट्टरपंथी ब्लॉग अब भी बिना किसी रोक-टोक के अपनी वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल के जरिए काम कर रहे हैं.
असल में रोक प्लेटफॉर्म्स तक सीमित है, कंटेंट तक नहीं. चुनिंदा चैनलों को ब्लॉक तो कर दिया गया है लेकिन उनके वेबसाइट्स, वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स और प्रोपेगेंडा नेटवर्क को खुला छोड़ देने से पाकिस्तान से आने वाला कंटेंट भारतीय दर्शकों तक न सिर्फ पहुंच रहा है बल्कि पाकिस्तान उससे अच्छी-खासी कमाई भी कर रहा है.
आकाश शर्मा