मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब पड़ोसी देश नेपाल की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. इजरायल- अमेरिका और इराक के बीच बढ़ते तनाव की वजह से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आया है. नेपाल ऑयल निगम ने पिछले एक महीने के भीतर पांचवीं बार ईंधन के दामों में बढ़ोतरी कर दी है. बुधवार रात 12 बजे से लागू हुई नई दरों ने आम आदमी की जेब पर बड़ा बोझ डाल दिया है. अब नेपाल में एक लीटर डीजल की कीमत ₹234.50 (नेपाली रुपया) और पेट्रोल की कीमत ₹216.50 तक पहुंच गई है.
नेपाल ऑयल निगम का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अचानक बढ़ने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है. आंकड़ों के मुताबिक निगम को करीब 7 अरब 81 करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व घाटे का अनुमान है. हालांकि नेपाल की नई सरकार ने कस्टम ड्यूटी में 50 प्रतिशत की छूट दी थी, लेकिन इसके बावजूद घाटा कम नहीं हो रहा है. हालत यह है कि कीमतों में इतनी बड़ी वृद्धि के बाद भी निगम को डीजल पर प्रति लीटर ₹87.90 और पेट्रोल पर ₹2.32 का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
10 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
इस मूल्य वृद्धि के बाद बिहार के रक्सौल और नेपाल में तेल की कीमतों का अंतर अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. आपको याद होगा कि करीब 10 साल पहले तक नेपाल में पेट्रोल-डीजल बिहार के रक्सौल के मुकाबले ₹20 से ₹28 तक सस्ता मिलता था. उस समय हालात ऐसे थे कि रक्सौल के कई पेट्रोल पंप बंद होने की कगार पर आ गए थे, क्योंकि लोग सीमा पार जाकर तेल भरवाते थे. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और रक्सौल में तेल लेना बहुत सस्ता हो गया है.
अगर आंकड़ों की तुलना करें तो भारतीय रुपये (IC) के हिसाब से रक्सौल में डीजल ₹93.24 है, जबकि नेपाल में यही डीजल भारतीय मुद्रा में ₹146.56 का पड़ रहा है. यानी रक्सौल में डीजल करीब ₹53 सस्ता है. वहीं पेट्रोल की बात करें तो रक्सौल में यह ₹106.97 है, जबकि नेपाल में भारतीय रुपये के हिसाब से इसकी कीमत ₹135.31 बैठती है. पेट्रोल में भी ₹28 का बड़ा अंतर आ गया है. कीमतों के इस बड़े फासले ने सीमावर्ती इलाकों के बाजारों में हलचल तेज कर दी है.
गणेश शंकर