नेपाली PM ने कर दिया कमाल... Gen-Z आंदोलन में मारे गए 27 छात्रों के परिवार को दी सरकारी नौकरी

नेपाल में प्रधानमंत्री बनने के साथ ही बालेन शाह ने बड़ा कदम उठाया है. जेन जी आंदोलन में मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का वादा तुरंत पूरा किया गया.

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नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह. (Photo: PTI) नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

नेपाल में नई सरकार बनते ही प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बड़ा फैसला लिया है. 'जेन जी' आंदोलन के दौरान मारे गए 27 छात्रों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का वादा अब जमीन पर उतरता दिख रहा है.

8 सितंबर को हुए इस आंदोलन में पुलिस फायरिंग के चलते पहले दिन 19 छात्रों की मौत हो गई थी, जबकि अगले दिन अस्पताल में इलाज के दौरान 8 और छात्रों ने दम तोड़ दिया था. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और सरकार पर लगातार दबाव बन रहा था कि पीड़ित परिवारों को न्याय और सहायता दी जाए.

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प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे को प्राथमिकता दी गई. बैठक में फैसला लिया गया कि मृतक छात्रों के परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाएगी, ताकि उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके.

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इस फैसले पर तेजी से अमल करते हुए ऊर्जा मंत्रालय के तहत आने वाले नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने आधिकारिक सूचना जारी कर दी है. प्राधिकरण ने 27 छात्रों के निकटतम परिजनों की सूची प्रकाशित की है और उन्हें उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर उनके गृह जिले में नौकरी देने का प्रस्ताव दिया गया है.

प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि जिन परिजनों को नौकरी दी जानी है, उन्हें 35 दिनों के भीतर अपने संबंध का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा. इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र सौंप दिया जाएगा.

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यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तुरंत लागू भी कर दिया गया. बालेन शाह ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि जेन जी आंदोलन में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी दी जाएगी, और अब उन्होंने अपने वादे को निभाकर एक मजबूत राजनीतिक संदेश दिया है.

नेपाल की राजनीति में यह कदम सरकार की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण माना जा रहा है. हालांकि, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि सिर्फ नौकरी देना ही काफी नहीं है, बल्कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी जरूरी है.

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