भारत पर बालेन शाह के विवादित बयान के बाद अब क्या बोले नेपाली विदेश मंत्री

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को केवल द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाने की बात कही है और किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्पष्ट रूप से खारिज किया है. यह बयान प्रधानमंत्री बालेन शाह के ब्रिटेन को मध्यस्थता में शामिल करने के प्रस्ताव के बाद आया है, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

Advertisement
शिशिर खनाल ने अपने पीएम के बयान को खारिज किया है (Photo: File/AFP) शिशिर खनाल ने अपने पीएम के बयान को खारिज किया है (Photo: File/AFP)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान से भारी विवाद हो गया था. उन्होंने भारत-नेपाल के बीच सीमा विवाद के निपटान के लिए ब्रिटेन को शामिल किए जाने की बात कह दी थी जिसपर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी. अब नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि दोनों देशों का सीमा विवाद द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए. 

Advertisement

नेपाल के विदेश मंत्री ने किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ सीमा विवादों का समाधान द्विपक्षीय स्तर पर ही करना चाहती है.

बुधवार को नेपाली संसद में बोलते हुए खनाल ने कहा, 'मैं इस सम्मानित सदन को स्पष्ट करना चाहता हूं कि नेपाल-भारत सीमा का मुद्दा एक द्विपक्षीय विषय है. नेपाल हमेशा ऐतिहासिक संधियों, समझौतों और मानचित्रों के आधार पर कूटनीतिक बातचीत और वार्ता के जरिए इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है.'

उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल-भारत सीमा कार्य समूह (BWG) और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों ने उन क्षेत्रों में भी काम फिर से शुरू कर दिया है, जहां सालों से प्रगति रुकी हुई थी. हालांकि, उन्होंने इसके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी.

Advertisement

बालेन शाह के बयान से भारत-नेपाल के बीच बढ़ा था तनाव

यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ हफ्ते पहले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा था कि भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़ी बातचीत में ब्रिटेन को भी शामिल किया जाना चाहिए. भारत ने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया था.

यह दूसरा मौका है जब खनाल ने इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया है. पिछले हफ्ते भारत यात्रा के दौरान भी उन्होंने कहा था कि सभी विवादों का समाधान 'मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के जरिए, सबूतों और तथ्यों के आधार पर' किया जाएगा, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से.

5 से 7 जून के बीच खनाल भारत आए थे. उनसे ठीक पहले नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के प्रमुख रबी लामिछाने ने भारत का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी.

बालेन शाह ने सीमा विवाद को अंतरराष्ट्रीय फोरम तक ले जाने की कोशिश की थी 

ये यात्राएं भारत-नेपाल संबंधों के लिए संवेदनशील समय में हुईं, क्योंकि बालेन शाह ने हाल ही में सीमा विवाद को फिर से उठाया और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश की. उन्होंने यह भी कहा कि वो सरकार या राज्य प्रमुख के लेवल से नीचे के अधिकारियों से मुलाकात नहीं करेंगे. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका के दूत सर्जियो गोर से मिलने से भी इनकार कर दिया था.

Advertisement

बालेन शाह के बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि सीमा संबंधी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय स्तर पर ही होगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'सीमा संबंधी सभी मुद्दों से निपटने के लिए हमारे पास स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं. यह सभी संबंधित पक्षों को साफ होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच किसी द्विपक्षीय मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.'

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »