नेपाल सरकार ने साल 2005 से 2025 के बीच सार्वजनिक पद पर रहे प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च अधिकारियों की संपत्ति का विवरण जुटाने और जांच करने के लिए एक आयोग गठन किया है. इसमें 100 से अधिक मंत्रियों की संपत्ति की जांच भी की जाएगी.
बुधवार को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश राजेंद्र भंडारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय आयोग बनाने का फैसला लिया.
आयोग में पूर्व न्यायाधीश चंडी राज ढकाल, पुरुषोत्तम प्रजापति, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल शामिल हैं.
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद 27 मार्च को 15 दिनों के भीतर इस तरह का आयोग गठित करने का फैसला लिया गया था. यह प्रावधान सरकार के 100 बिंदुओं वाले शासन सुधार एजेंडा के बिंदु संख्या 43 में शामिल था.
इस एजेंडा में भ्रष्टाचार, अवैध संपत्ति अर्जन और दंडहीनता को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत एक सशक्त संपत्ति जांच आयोग बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है.
आयोग को कानूनी, साक्ष्य-आधारित और निष्पक्ष तरीके से जांच करने का अधिकार दिया गया है. सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और सिफारिशों को संबंधित निकायों के माध्यम से लागू किया जाएगा.
इस जांच के घेरे में पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार के लोग जांच के घेरे में आ गए हैं. इनमें पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली, पुष्प कमल दहाल प्रचण्ड, शेर बहादुर देउवा, डॉ. बाबूराम भट्टराई, माधव कुमार नेपाल, खिलराज रेगमी, झलनाथ खनाल जांच के दायरे में हैं. इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा कोइराला की बेटी सुजाता कोइराला भी जांच के दायरे में है.
इसके अलावा 2005 से 2025 तक बने सरकार के मंत्री रहे सभी नेताओं की संपत्ति की भी जांच की जाएगी. इसके अलावा इन 20 सालों के दौरान रहे सभी उच्च अधिकारियों, संवैधानिक और राजनैतिक नियुक्ति पाने वालों को भी जांच के दायरे में रखा गया है.
पंकज दास