एवरेस्ट पर 20 मिलियन डॉलर का इंश्योरेंस स्कैम, शेरपाओं द्वारा पर्वतारोहियों को बीमार करने का आरोप

नेपाल में माउंट एवरेस्ट से जुड़ा एक बड़ा बीमा घोटाला सामने आया है. आरोप है कि कुछ शेरपा और ट्रेकिंग कंपनियां पर्यटकों को बीमार दिखाकर महंगे हेलिकॉप्टर रेस्क्यू कराती थीं और बीमा कंपनियों से पैसा वसूलती थीं. इस मामले में 32 लोगों पर केस दर्ज किया गया है, जिनमें कंपनियों, हेलिकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल से जुड़े लोग शामिल हैं. इस स्कैम से करीब 20 मिलियन डॉलर की ठगी हुई है.

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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, लेकिन भरोसे की सबसे बड़ी दरार (Photo: Reuters) दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, लेकिन भरोसे की सबसे बड़ी दरार (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोहियों के साथ धोखेबाज़ी का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है. जिस एवरेस्ट पर लोग अपनी जान की बाजी लगाकर चढ़ते हैं, वहां कुछ लोगों ने पैसों के लालच में एक बड़ा और खतरनाक खेल खेल दिया. एवरेस्ट के शेरपाओं पर आरोप लगा है कि उन्होंने $20 मिलियन के इंश्योरेंस घोटाले के लिए पर्वतारोहियों (क्लाइम्बर्स) को जहर दिया. जहर का मतलब यहां जान से मारना नहीं, बल्कि उन्हें जानबूझकर बीमार करना था ताकि मोटा पैसा कमाया जा सके.

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काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल पुलिस ने इस मामले में एक-दो नहीं बल्कि 32 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इसमें ट्रेकिंग कंपनियों के मालिक, हेलिकॉप्टर चलाने वाली कंपनियां और अस्पतालों के बड़े अधिकारी शामिल हैं. इन सबको संगठित अपराध और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी बनाया गया है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये पूरा स्कैम काम कैसे करता था? तो चलिए इसे समझते हैं.

जांच में जो बात सामने आई है वो डराने वाली है. जांच अधिकारियों ने बताया कि ट्रेकिंग एजेंसियों के साथ काम करने वाले कुछ शेरपा, वहां आने वाले सैलानियों के खाने में चोरी-छिपे 'बेकिंग सोडा' मिला देते थे. बेकिंग सोडा ज्यादा मात्रा में पेट में जाने से सैलानियों की तबीयत बिगड़ने लगती थी. उन्हें पेट में भयानक दर्द और उल्टी जैसी दिक्कतें होने लगती थीं. ये लक्षण बिल्कुल वैसे ही दिखते थे जैसे ऊंचाई पर जाने से होने वाली बीमारी या फूड पॉइजनिंग में होते हैं.

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जब सैलानी बीमार पड़ जाता था, तो उस पर दबाव बनाया जाता था कि वह तुरंत इमरजेंसी हेलिकॉप्टर से नीचे जाए. अब पहाड़ों पर हेलिकॉप्टर का किराया बहुत ज्यादा होता है. सैलानी तो अपनी जान बचाने के लिए तैयार हो जाता था, लेकिन इसके पीछे असली मकसद था इंटरनेशनल इंश्योरेंस कंपनियों से पैसा ऐंठना. ये लोग हेलिकॉप्टर और अस्पताल के फर्जी बिल और मेडिकल कागजात तैयार करते थे और फिर इंश्योरेंस कंपनियों से भारी-भरकम क्लेम वसूलते थे. इस कमाई को शेरपा, हेलिकॉप्टर कंपनी, ट्रेकिंग एजेंसी और अस्पताल आपस में बांट लेते थे.

इस घोटाले की पोल तब खुली जब जनवरी में तीन बड़ी रेस्क्यू कंपनियों के 6 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया. जांच में पता चला कि एक कंपनी ने तो हद ही कर दी. उसने 1,248 रेस्क्यू का दावा किया, जिनमें से 171 पूरी तरह फर्जी थे. सिर्फ इसी एक कंपनी ने करीब 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी की. दूसरी कंपनी ने भी 75 फर्जी रेस्क्यू दिखाकर करीब 8 मिलियन डॉलर हड़प लिए, जबकि तीसरी कंपनी ने 1 मिलियन डॉलर से ज्यादा के झूठे क्लेम किए.

इस घोटाले की वजह से नेपाल के टूरिज्म की दुनिया भर में बदनामी हो रही है. कई बड़ी इंटरनेशनल इंश्योरेंस कंपनियों ने तो अब नेपाल आने वाले सैलानियों का इंश्योरेंस करना ही बंद कर दिया है. सरकार ने पहले भी नियम बनाए थे कि बीच के दलालों को हटाया जाए, लेकिन नेपाल पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जब तक अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, ऐसे स्कैम फलते-फूलते रहेंगे.
 

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