कुवैत पर बुधवार को ईरान ने तड़ातड़ हमले किए. कुवैत की सेना ने कहा है कि पिछले 24 घंटों के दौरान सशस्त्र बलों ने कुवैती हवाई क्षेत्र में दुश्मन के कुल 20 बैलेस्टिक मिसाइलों को टारगेट किया. इनमें से 13 मिसाइलों को आसमान में नष्ट कर दिया गया, जबकि 7 मिसाइलें जमीन पर गिरीं. कुवैत का कहना है कि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है.
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सेना ने दुश्मन के 9 ड्रोन भी डिटेक्ट किए. जिनमें से 6 को नष्ट कर दिया गया. वहीं 2 ड्रोन ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद ईंधन के एक टैंक में गिरे जिससे आग लग गई.
इस आग को बुझाने का काम विशेष टीमें कर रही हैं. और इसमें किसी भी तरह की जान-माल की हानि की कोई सूचना नहीं है. इस बीच एक ड्रोन खतरे वाले क्षेत्र के बाहर जा गिरा है.
सैन्य अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय के तहत नेशनल गार्ड के एक दस्ते ने अपने अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में एक ड्रोन और 5 ड्रोन विमानों को नष्ट करने में सफलता हासिल की है.
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने 28 फरवरी को ईरानी हमलों की शुरुआत के बाद से तीसरी बार ईरान के राजदूत मोहम्मद तूतोंजी को तलब किया और उन्हें लगातार हो रहे हमलों पर एक औपचारिक विरोध नोट सौंपा.
एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि राजदूत को समन की कार्रवाई कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईंधन टैंकों को निशाना बनाए जाने के बाद किया गया है; मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का "गंभीर उल्लंघन" बताया और यह भी कहा कि यह हवाई अड्डा एक नागरिक सुविधा है.
मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और हवाई क्षेत्र का "स्पष्ट उल्लंघन" बताया; साथ ही इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करार दिया.
मंत्रालय ने हमलों को तत्काल रोकने की मांग की और उनके परिणामों के लिए ईरान को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया. साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के कुवैत के अधिकार की भी पुष्टि की.
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