क्यों अहम है 'मिनरल कॉन्फ्रेंस'? जिसमें PAK को न्योता नहीं और अमेरिका पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा और क्वाड सहयोग पर चर्चा की. नई ट्रेड डील से भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में रुबियो मुलाकात की (Photo-X) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में रुबियो मुलाकात की (Photo-X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:15 AM IST

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है.

जयशंकर की यह मुलाकात 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान हुई. यहा ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन होना है, जिसमें जी-7 देशों के साथ-साथ खनिज-संपन्न देशों की भागीदारी प्रस्तावित है. इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान को न्योता नहीं मिला है.

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इस मंच का उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के वैकल्पिक आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना है. बैठक में दोनों नेताओं ने क्वाड (Quad) के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने बातचीत को “व्यापक और सार्थक” बताते हुए कहा कि इसमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

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रुबियो और जयशंकर के बीच हुई बातचीत में व्यापार समझौते, क्रिटिकल मिनरल्स और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर विशेष जोर रहा. दोनों नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रोसेसिंग में औपचारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की और डोनाल्ड ट्रंप व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए ट्रेड डील का स्वागत किया.

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बैठक में लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक अवसर खोलने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और क्वाड के जरिए बहुपक्षीय सहयोग विस्तार पर सहमति बनी, साथ ही एक समृद्ध और स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को साझा रणनीतिक हितों के लिए अहम बताया गया.

इसलिए अहम है कॉन्फ्रेंस

ग्लोबल मिनरल्स कॉन्फ्रेंस और 'क्रिटिकल मिनरल्स' जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य की दिशा तय करने वाले मंच माना जा रहा है. इनका मुख्य उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट, सेमीकंडक्टर सामग्री और दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Elements) जैसी रणनीतिक संपदाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है.

इसका मकसद चीन को काउंटर करना भी है.वर्तमान में दुर्लभ खनिजों के बाजार पर चीन का वर्चस्व है. यह सम्मेलन आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के लिए चीन पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक वैश्विक केंद्र बनाने पर केंद्रित है. खनिजों के खनन से लेकर उनके प्रसंस्करण (Processing) तक की सुरक्षित और टिकाऊ व्यवस्था बनाना, ताकि रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों को कोई झटका न लगे.

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पाकिस्तान को बड़ा झटका
 एक तरफ जहां जयशंकर वॉशिंगटन में 'ग्लोबल मिनरल्स कॉन्फ्रेंस' में हिस्सा ले रहे हैं, वहीं पाकिस्तान को इस महत्वपूर्ण बैठक से बाहर रखा गया है. यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है, क्योंकि पिछले साल ही पाक प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने ट्रंप को दुर्लभ खनिजों (Rare Earths) का डिब्बा भेंट कर वैश्विक बाजार में जगह बनाने की कोशिश की थी. पाकिस्तान हाल के वर्षों में खुद को दुर्लभ खनिजों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है.

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इस बैठक में G7 देशों के अलावा खनिज समृद्ध अफ्रीकी देश भी शामिल हो रहे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन के लिए चीन पर निर्भरता कम करना है. जयशंकर और रुबियो ने क्वाड (Quad) के माध्यम से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रोसेसिंग में औपचारिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया.

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