इजरायल की स्पेशल फोर्सेज ने पूर्वी लेबनान में रात के अंधेरे में एक अलग किस्म का ऑपरेशन चलाया. यहां स्पेशल फोर्सेज सैनिकों ने एक गांव के कब्रिस्तान पहुंची थी. मकसद उस पायलट के अवशेषों को ढूंढना था, जो करीब चार दशक (40 साल) पहले लापता हो गया था.
इस मिशन की पुष्टि इजरायल ने शुक्रवार को की, जिसका मकसद लापता इजरायली वायु सेना के नेविगेटर रॉन अराद के शव को बरामद करना था, जिनका विमान 1986 में लड़ाई के दौरान गिरा दिया गया था.
इजरायली अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान इजरायली सैनिकों में से किसी को भी कोई नुकसान नहीं हुआ, हालांकि अंततः अराद के अवशेषों का कोई सबूत नहीं मिला. यह भी संकेत दिया गया कि खोज जारी रहेगी.
बेकआ घाटी के कब्रिस्तान की तलाशी ली गई
बेका घाटी के नाबिशित गांव से मिली जानकारी के मुताबिक, इजरायली कमांडो को देर रात चार हेलीकॉप्टरों में इलाके में लाया गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सैनिकों को रस्सियों की मदद से नीचे उतारा गया, जिसके बाद वे एक स्थानीय कब्रिस्तान में दाखिल हुए और वहां खुदाई शुरू की गई. माना जा रहा था कि यह अराद से जुड़ा एक संभावित दफन स्थल है.
एक कब्र पर हाल ही में खोदी गई मिट्टी दिखाई दे रही थी, जिससे पता चलता है कि सेना के पीछे हटने से पहले उस जगह की थोड़ी खुदाई की गई थी.
एक रहस्य जो 1986 में शुरू हुआ था
यह ऑपरेशन इजरायल के सबसे लंबे समय से चले आ रहे सैन्य रहस्यों में से एक से जुड़ा है. 1986 में, इजरायल और लेबनानी आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह के बीच दुश्मनी के दौरान, लेबनान के ऊपर एक इजरायली विमान को मार गिराया गया था. इस घटना के बाद विमान के नेविगेटर, रॉन अराद, लापता हो गए थे.
माना जाता है कि दुर्घटना के तुरंत बाद बेका घाटी में कहीं उनकी मृत्यु हो गई और उन्हें वहीं दफना दिया गया, हालांकि सटीक स्थान की कभी पुष्टि नहीं हुई है.
'लोगों का मानना है कि मरने के बाद उन्हें यहीं दफनाया गया था,' रिपोर्टर ने कब्रिस्तान से कहा. 'लेकिन 40 साल बाद भी, इजरायल उस इजरायली पायलट के शव की तलाश कर रहा है.'
तलाशी अभियान के दौरान लेबनानी सेना के साथ-साथ हिज्बुल्लाह के लड़ाकों से भी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सेनाएं इलाके से पीछे हट गईं.
लेबनान में मौजूदा संघर्ष के तेज होने के बावजूद, इजरायली अधिकारियों का कहना है कि लापता पायलट को ढूंढने का मिशन छोड़ा नहीं गया है.
अशरफ वानी