ग्राउंड रिपोर्ट: सायरन का शोर और शेल्टर होम का अंधेरा...ईरानी मिसाइलों से तेल अवीव में खौफ

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने तेल अवीव की रातों का सुकून छीन लिया है. इजरायल में अब सायरन बजना और घंटों शेल्टर में बिताना लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है.

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ईरानी मिसाइलों का खौफ और सायरन का शोर (Photo: ITG) ईरानी मिसाइलों का खौफ और सायरन का शोर (Photo: ITG)

प्रणय उपाध्याय

  • तेल अवीव,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां आम लोगों की जिंदगी सायरन के शोर और शेल्टर होम के अंधेरे के बीच सिमट गई है. इजरायल की राजधानी तेल अवीव में शाम के करीब 8:30 बजे थे. शहर की सड़कों पर रौनक थी, लोग डिनर के लिए बाहर निकले थे, तभी अचानक ईरान हमले के अलर्ट ने पूरे शहर को सख्ते में डाल दिया.

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जैसे ही सायरन गूंजा, लोग जहां थे वहीं रुक गए और अगले ही पल पास के पब्लिक शेल्टर की ओर दौड़ पड़े. यह सब कुछ तब हो रहा है जब दुनिया भर में कूटनीतिक समाधान की बातें चल रही हैं. लेकिन हकीकत इन दावों से कोसों दूर है. सायरन बजते ही हर नागरिक के लिए एक ही स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है फौरन नजदीकी शेल्टर में पहुंचना.

जमीन के नीचे कैद हुई राजधानी

आजतक की टीम भी उस वक्त ग्राउंड जीरो पर मौजूद थी. हमने देखा कि कैसे आम लोग पल भर में जमीन के नीचे बने मल्टी-लेयर शेल्टर्स में समा गए. यह शेल्टर जमीन से कई स्तर नीचे बने होते हैं ताकि किसी भी मिसाइल हमले के सीधे असर से बचा जा सके. लोग वहां शांति से बैठकर अपने मोबाइल फोन पर 'होम फ्रंट कमांड' के उस मैसेज का इंतजार करते हैं, जो उन्हें बाहर निकलने की इजाजत देता है.

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हैरानी की बात यह है कि इजरायल के लोगों ने अब इस स्थिति को अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लिया है. उनके लिए सायरन बजना और शेल्टर में भागना अब एक डेली रूटीन जैसा हो गया है. जब तक मोबाइल पर 'ऑल क्लियर' का मैसेज नहीं आता, तब तक ये लोग जमीन के नीचे ही सुरक्षित रहते हैं.

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