बारूद के ढेर पर बैठा लेबनान इस वक्त सुलग रहा है. कहीं चीख-पुकार मची है तो कहीं मलबे के ढेर तबाही की गवाही दे रहे हैं. इजरायल और हिजबुल्लाह की इस भीषण जंग ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. इजरायली फाइटर जेट्स आसमान से आग बरसा रहे हैं और साउथ लेबनान का तो हुलिया ही बिगड़ चुका है. हालात इतने खराब हैं कि करीब 7 लाख लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हैं. यह रिपोर्ट उस तबाही की कहानी है, जिसे शब्दों में बयान करना भी मुश्किल है.
खूबसूरत टायर शहर खंडहर में तब्दील
कभी समंदर के किनारे बसा लेबनान का टायर शहर अपनी खूबसूरती और होटलों के लिए मशहूर था. जब यहां फ्रांस का राज था, तब इसे सबसे शानदार शहर माना जाता था, लेकिन आज यहां की हवाओं में सिर्फ बारूद की गंध और मौत का सन्नाटा है. इजरायली फाइटर जेट्स आसमान से आग बनकर बरसते हैं और पलक झपकते ही हंसते-खेलते मोहल्लों को मलबे के ढेर में बदल देते हैं. जिन आलीशान होटलों में कभी रौनक हुआ करती थी, वहां अब अंधेरा छाया हुआ है. सड़कें वीरान हैं और लोग अपने ही शहर में बेगाने होकर जान बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं.
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चुन-चुनकर निशाना, पर मासूम भी बन रहे शिकार
इजरायल का दावा है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बना रहा है, लेकिन हकीकत बहुत डरावनी है. इन हमलों में मासूम लोग भी अपनी जान गंवा रहे हैं. पिछले दो दिनों में युद्ध इतना तेज हो गया है कि इजरायली सेना ने 50 से ज्यादा गांवों को खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है. इजरायल चाहता है कि हिजबुल्लाह और लेबनीज आर्मी लेटानी नदी के पीछे चले जाएं. हाल ही में दो गांवों में हुई बमबारी में 20 स्थानीय लोगों की मौत हो गई. हालांकि, इजरायल को भी नुकसान हुआ है. हिजबुल्लाह के मिसाइल हमले में दो इजरायली सैनिक भी मारे गए हैं.
बेघर हुए 2 लाख बच्चे
इस जंग की सबसे दर्दनाक तस्वीर बच्चों की है. यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात दिनों में ही लेबनान में 83 बच्चों की मौत हो चुकी है और 254 बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं. करीब 2 लाख बच्चे अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं. वे अब रिफ्यूजी कैंपों में बिना छत और खाने के रहने को मजबूर हैं. साउथ लेबनान का कोई भी हिस्सा अब सुरक्षित नहीं बचा है. चाहे वह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स हो या गोदाम, इजरायली बमबारी ने हर चीज को धुआं-धुआं कर दिया है.
बैंक और तिजोरी पर भी हमला
इजरायल सिर्फ लड़ाकों को ही नहीं मार रहा, बल्कि लेबनान की कमर तोड़ने के लिए उसकी अर्थव्यवस्था पर भी वार कर रहा है. लेबनान में 'अल कर्ज अल हसन' नाम का एक बैंकिंग सिस्टम चलता है. इजरायली सेना (IDF) का मानना है कि ये हिजबुल्लाह को पैसों से मदद करते हैं. पिछले एक हफ्ते में ऐसे 20 वित्तीय संस्थानों को बम से उड़ा दिया गया है. टायर में मौजूद ऐसे ही एक बैंक की इमारत आज सुबह हुई बमबारी के बाद पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी है.
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लेबनान संकट पर फ्रांस का एक्शन
लेबनान में बिगड़ते हालात को देखते हुए फ्रांस अब एक्शन में आया है. फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की है. अब तक हमलों में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. फ्रांस ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए करीब 7 मिलियन डॉलर की आपात सहायता और 20 टन राहत सामग्री भेजने का फैसला किया है, जो जल्द ही लेबनान पहुंचेगी.
क्या रुक पाएगी ये तबाही?
इजरायल ने भले ही दावा किया था कि उसने हसन नसरल्लाह और हिजबुल्लाह की पूरी लीडरशिप को खत्म कर दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि हिजबुल्लाह अब भी इजरायल को कड़ी चुनौती दे रहा है. उनके पास हथियारों का बड़ा जखीरा है और वे लगातार पलटवार कर रहे हैं. लेबनान के राष्ट्रपति का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक बमबारी नहीं रुकती, शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आती. फिलहाल लेबनान के बड़े शहर खाली हो रहे हैं और लाखों लोग बेघर होकर दर-दर भटक रहे हैं.
अशरफ वानी