आयरलैंड में भारतीय समुदाय के खिलाफ बढ़ते जेनोफोबिया के बीच एक फोटो सोशल मीडिया पर नस्लीय टिप्पणियों का कारण बन गई. दरअसल, हाल ही में 'द आयरिश टाइम्स' में यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे की एक रिपोर्ट छपी, जिसमें बढ़ती महंगाई के कारण छात्रों को मुफ्त भोजन के लिए कतारों में खड़ा दिखाया गया.
इस रिपोर्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर भारतीयों को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक और नस्लवादी टिप्पणियों की बाढ़ आ गई. रिपोर्ट में बताया गया कि ‘स्पेयर स्टूडेंट पेंट्री' जो शुरुआत में एक पर्यावरण पहल के रूप में शुरू हुई थी, अब आयरलैंड में बढ़ती महंगाई (कॉस्ट-ऑफ-लिविंग क्राइसिस) के कारण भारी दबाव में है.
पिछले साल इस पैंट्री ने करीब 5 लाख यूरो मूल्य का भोजन वितरित किया, फिर भी हर हफ्ते सैकड़ों छात्रों को लौटाना पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने बिना किसी प्रमाण के दावा किया कि कतार में खड़े 90% से ज्यादा लोग भारतीय छात्र हैं.
निशाने पर भारतीय
कुछ यूजर्स ने इसे भारतीयों की 'आदत' बताया और आरोप लगाया कि वे पैसे बचाने के लिए इन सुविधाओं का 'लाइफ-हैक' के रूप में गलत इस्तेमाल करते हैं. कुछ यूज़र्स ने सवाल उठाया कि कतार में खड़े अधिकतर छात्र विदेशी क्यों हैं और कहा कि “विदेशी छात्रों को खुद अपना खर्च उठाने में सक्षम होना चाहिए.”
कुछ पोस्ट ने सीधे भारतीयों को निशाना बनाया. एक यूज़र ने दावा किया कि “यह भारतीयों की आदत है” और आरोप लगाया कि वे फूड बैंकों का इस्तेमाल पैसे बचाने के ‘लाइफहैक’ की तरह करते हैं. अन्य टिप्पणियों में बिना किसी सबूत के कहा गया कि पूरी कतार भारतीयों की थी.
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भारतीयों के साथ हिंसक घटनाएं
यह ऑनलाइन प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पिछले वर्ष आयरलैंड में भारतीयों के खिलाफ हिंसक घटनाएं भी सामने आई थीं. डबलिन के टलाघ्ट इलाके में हाल ही में पहुंचे एक 40 वर्षीय भारतीय पेशेवर, जो Amazon में कार्यरत थे, पर युवकों के एक गिरोह ने हमला किया था. उन पर चाकू से वार किया गया और मामले को संभावित हेट क्राइम के रूप में जांचा गया.
वहीं संतोष यादव नामक भारतीय मूल के व्यक्ति की चेहरे की हड्डी तोड़ दी गई थी. इन बढ़ती घटनाओं ने वहां पढ़ रहे और काम कर रहे भारतीयों के मन में डर पैदा कर दिया है.
हकीकत बनाम नफरत
आयरलैंड में रह रहे 1,00,000 से अधिक भारतीय चिकित्सा और आईटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़ा योगदान दे रहे हैं. हकीकत यह है कि आयरलैंड में इस समय भारी आवास संकट (Housing Crisis) है, जहाँ छात्रों को €1,000 तक किराया देना पड़ता है. 'द आयरिश टाइम्स' की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि भोजन लेने वाले छात्र केवल भारतीय थे, लेकिन नफरत फैलाने वालों ने इसे हथियार बना लिया.
भारत में स्थित Embassy of Ireland in India ने हाल ही में भारतीय छात्रों की चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि आयरलैंड एक सुरक्षित और समावेशी देश है, हालांकि नस्लीय घटनाओं को “गंभीर चिंता का विषय” बताया गया.
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रिपोर्ट में छात्रों की राष्ट्रीयता का कोई आधिकारिक ब्योरा नहीं दिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और नस्लीय टिप्पणियों ने भारतीय समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है. बढ़ते किराये, आवास संकट और वीजा से जुड़ी चुनौतियों के बीच अब ऑनलाइन नफरत की यह लहर भी भारतीय छात्रों के लिए चिंता का कारण बन गई है.
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