मिडिल ईस्ट में एक और जंग की आहट... इराक और कुवैत में क्यों बढ़ रहा तनाव, सऊदी का भी आया बयान

इराक और कुवैत के बीच ये मसला अभी कूटनीतिक स्तर पर है. लेकिन 1990 को याद कीजिए. तब सद्दाम हुसैन ने इसी तरह के विवादों को बहाना बनाकर कुवैत पर आक्रमण किया था, जिससे इतिहास की यादें ताजा हो रही है. अब सद्दाम तो नहीं हैं लेकिन मुद्दा लगभग वैसा ही है. जलमार्ग नेविगेशन, तेल परिवहन और मछली पकड़ने का अधिकार दोनों देशों के लिए संवेदनशील है.

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इराकी सेना का एक दस्ता (File Photo: ITG) इराकी सेना का एक दस्ता (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:49 PM IST

1990 के गल्फ वार का साया एक बार फिर से मंडरा रहा है. खाड़ी के दो देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर तनाव बढ़ रहा है और ये मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच चुका है. ये दो देश हैं इराक और कुवैत. हालांकि यह कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि पुराना विवाद है जो 1990 के गल्फ वॉर और उसके बाद के प्रस्ताव से जुड़ा है. 

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इसी महीने इराक ने संयुक्त राष्ट्र को अपना एक नक्शा और अपनी भौगोलिक चौहद्दी संयुक्त राष्ट्र में जमा किया. इस नक्शे में उसने फारस की खाड़ी में अपनी समुद्री सीमाओं को परिभाषित करने की कोशिश की है. 

इराक का दावा है कि यह उसके क्षेत्रीय जलसीमा को स्पष्ट करता है, खासकर खोर अब्दुल्ला (Khor Abdullah) जलमार्ग और आसपास के इलाकों को.  लेकिन कुवैत का कहना है कि इस नक्शे में फिश्त अल-क़ैद और फिश्त अल-ईज जैसे छोटे द्वीपों और उथले क्षेत्रों को इराकी क्षेत्र दिखाया गया है. ऐसा करना कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन है. कुवैत के अनुसार ये क्षेत्र हमेशा से उसके हैं और कभी विवादित नहीं रहे. 

पहले, पहले गल्फ वॉर के बारे में जानें

इराक और कुवैत के बीच 1990 में भी टकराव हो चुका है. ये लड़ाई 2 अगस्त 1990 को शुरू हुई. जब इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने पड़ोसी देश कुवैत पर आक्रमण कर उस पर कब्जा कर लिया. इसका मुख्य कारण कुवैत के तेल भंडार पर कब्जा और क्षेत्रीय दबदबे को बढ़ाना था. 
संयुक्त राष्ट्र ने इराक की निंदा की और आर्थिक प्रतिबंध लगाए.  अमेरिका के नेतृत्व में 34 देशों ने गठबंधन बनाया. पहले ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड के तहत सैन्य तैयारी हुई, फिर 17 जनवरी 1991 से ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म शुरू हुआ. 

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सद्दाम हुसैन अड़े रहे लेकिन अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों के गठबंधन में इराक पर भारी बमबारी की. 28 फरवरी 1991 को 100 घंटे के जमीनी युद्ध के बाद कुवैत मुक्त हुआ. इसमें गठबंधन की निर्णायक जीत हुई, लेकिन सद्दाम सत्ता में बने रहे.इस युद्ध ने तेल की कीमतों और मध्य पूर्व की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया. 

ताजा विवाद क्या है

इराक और कुवैत के बीच ताजा टकराव इराक के उस दावे की वजह से हुआ है. जिसमें कुवैत के अनुसार इराक ने गल्फ के कई क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाया है.  कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इराक का दावा कुवैत की आज़ादी का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें कुवैती इलाकों, जिसमें फश्त अल-कायद और फश्त अल-ऐज शोल शामिल हैं, को इराकी इलाके में रखा गया है.

कुवैत के पड़ोसी अब उसके रुख का समर्थन कर रहे हैं. कतर, संयुक्त अमीरात और ओमान ने एकजुटता दिखाते हुए बयान जारी किए हैं. सऊदी अरब ने कहा कि उसे इराकी नक्शे को लेकर 'गंभीर चिंताएं' हैं, और कहा कि यह सऊदी-कुवैती संयुक्त इलाके में भी दखल देता है. 

इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने सोमवार को एक बयान में कहा कि कुवैत ने 2014 में इराक से सलाह किए बिना अपने नक्शे संयुक्त राष्ट्र के पास जमा कर दिए थे. 

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उन्होंने कहा कि इराक "इंटरनेशनल कानून के नियमों और तय कानूनी फ्रेमवर्क के अंदर अपने समुद्री अधिकारों को रेगुलेट करने के लिए प्रतिबद्ध है. इराक ने कहा कि इससे इस इलाके में स्टेबिलिटी और कोऑपरेशन को मज़बूत करने में मदद मिलेगी."

2019 में इराक ने UN में एक शिकायत भेजी थी और कुवैत पर आरोप लगाया गया कि उसने फश्त अल-ऐज शोल पर एक बंदरगाह बनाकर इस इलाके का भूगोल बदलने की कोशिश की. 

इराक और कुवैत के बीच सालों से खोर अब्दुल्ला को लेकर झगड़ा चल रहा है, जो एक पतला वॉटरवे है जिसे इराक और कुवैत शेयर करते हैं. ये समुद्री रास्ता  फ़ारस की खाड़ी में मिलता है. 

2012 में ये दोनों देश इस वॉटरवे को रेगुलेट करने के लिए एक समझौते पर पहुंचे. लेकिन 2023 में  दो इराकी सांसदों ने इस एग्रीमेंट को पलटने के लिए केस किया. इन सांसदों ने कहा कि यह समझौता इराक की सॉवरेनिटी का उल्लंघन करता है और इसे सही पार्लियामेंट्री प्रोसेस को फॉलो किए बिना अपनाया गया था.  इराक के सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस समझौते को रद्द कर दिया. 

ईरान के साथ व्यस्त है अमेरिका

गौरतलब है कि इराक और कुवैत के बीच ये विवाद तब सामने आया है जब इस पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खिलाड़ी अमेरिका ईरान के साथ टकराव में व्यस्त है. 

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बहरीन-सउदी अरब ने क्या कहा?

इस टकराव पर प्रतिक्रिया देते हुए बहरीन ने चिंता जताई है. बहरीन ने कहा है कि इराक द्वारा यूएन में सौंपा गया नक्शा उसके दोस्त मुल्क कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है. बहरीन ने कहा है कि वह समुद्री सीमाओं पर कुवैत की संप्रभुता का समर्थन करता है. बहरीन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि इराक ऐतिहासिक प्रथाओं और मौजूदा नॉर्म्स का सम्मान करेगा और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के सिद्धांतों का सम्मान करेगा.  

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इराक द्वारा यूनाइटेड नेशंस के पास जमा किए गए मैप पर गहरी चिंता के साथ नज़र रख रहा है. इसमें सऊदी-कुवैती डिवाइडेड ज़ोन के पास डिवाइडेड सबमर्ज्ड ज़ोन के बड़े हिस्से को कवर करने के लिए अतिक्रमण शामिल हैं. 

सऊदी इलाके में कुवैत स्टेट के साथ नेचुरल रिसोर्स का मालिकाना हक शेयर करता है, जो उनके बीच हुए और लागू एग्रीमेंट के अनुसार है, जो 1982 के यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी के प्रोविज़न पर आधारित हैं. 
 

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