ईरान ने पाकिस्तान बॉर्डर से घुसे दर्जनों आतंकवादियों को मार गिराया है. ये घटना तब हुई है जब पाकिस्तान ईरान वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है. इस घटना से दोनों देशों के बीच अचानक से तनाव बढ़ गया है. रिपोर्ट के अनुसार ईरानी सुरक्षा बलों ने जैश अल-अदल आतंकवादी समूह की एक ऑपरेशनल टीम को तबाह कर दिया. ये घटना तब हुई जब आतंकी पाकिस्तान सीमा से रास्क क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे थे. ईरान की इस कार्रवाई में कई आतंकवादी मारे गए.
ये घटना ईरान के सिस्तान-बलोचिस्तान प्रांत में हुई है. ईरान की सरकारी मीडिया 'तसनीम' की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी सुरक्षा बलों ने 'जैश अल-अदल' के कई आतंकियों को मार गिराया. ये आतंकी पाकिस्तान से सीमा पार करके ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के 'रास्क' इलाके में घुस आए थे.
ऑपरेशन के बाद ईरानी सेना ने जैश अल-अदल के आतंकियों से बड़ी मात्रा में हथियार जब्त किया है. ईरानी सेना के इस ऑपरेशन की ज्यादा जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है.
जैश अल-अदल एक बलूच सुन्नी आतंकी संगठन है, जो 2012 से ईरान-पाकिस्तान की खुली सीमा पर सक्रिय है. यह संगठन ईरानी पुलिस और IRGC के ठिकानों पर हमले करने के लिए जाना जाता है. रास्क इलाके में इस संगठन के साथ सुरक्षा बलों की कई बार झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें 2024 में हुई झड़पें भी शामिल हैं. अरबी में 'जैश अल-अदल' का मतलब “आर्मी ऑफ जस्टिस” होता है.
जैश अल-अदल की स्थापना लगभग 2012 में हुई थी, यह पहले से सक्रिय रहे आतंकी संगठन Jundallah के कमजोर पड़ने के बाद उसके ही सदस्यों से बना माना जाता है. ईरान का आरोप है कि यह संगठन देश के दक्षिण-पूर्वी इलाकों में अस्थिरता फैलाता है और सुरक्षा बलों पर हमले करता है.
यह संगठन खुद को ईरान के सुन्नी बलूच समुदाय के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाला बताता है. इसके घोषित उद्देश्यों में सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र के लिए अधिक राजनीतिक और आर्थिक अधिकार, बलूच समुदाय के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ संघर्ष शामिल है.
हालांकि ईरान और कई अन्य देश इसे आतंकी संगठन मानते हैं.
जैश अल-अदल की गतिविधियां मुख्य रूप से ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में और अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाके में है.
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