ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ जंग में सीजफायर करना तो चाहता है, लेकिन ईरान ने समझौते के सबसे अहम पहलू स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने से इनकार कर दिया है. ईरान के अधिकारियों ने रायटर्स को कहा है कि उन्हें पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम का एक प्रस्ताव मिला है और उस पर विचार किया जा रहा है, लेकिन तेहरान एक अस्थायी सीजफायर के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए तैयार नहीं है.
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि तेहरान पर दबाव डालकर अथवा डेडलाइन देकर युद्धविराम नहीं कराया जा सकता है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिया अल्टीमेटम कल रात को खत्म हो रहा है. ईरान ने इसी अल्टीमेटम का जिक्र करते हुए कहा है कि दबाव डालकर उसके साथ युद्धविराम नहीं कराया जा सकता है.
ईरानी अधिकारियों ने रॉयटर्स से यह भी कहा कि अस्थायी युद्धविराम के बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को तैयार नहीं है. ईरान ने कहा कि उन्हे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका स्थायी युद्धविराम को लेकर गंभीर नहीं है.
इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि ईरान और अमेरिका को दुश्मनी खत्म करने के लिए बने सीजफायर के मसौदे को ले लिया है. इसमें दो स्तरीय सीजफायर लागू करने और फिर आखिरी समझौता करने का जिक्र है.
अगर दोनों देश इस समझौते पर सहमत होते हैं तो दोनों पक्ष तुरंत सीजफायर की घोषणा करेंगे, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया जाएगा. इसके बाद 15-20 दिनों के बाद अंतिम समझौता किया जाएगा. ये जानकारी सूत्रों ने दी है.
इस सीजफायर के लिए पाकिस्तान भूमिका निभा रहा है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति वैंस, दूत विटकॉफ़ और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ अलग-अलग बातचीत की की है.
अगर ये समझौता अंतिम चरण तक पहुंचा है तो इसमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार छोड़ना, प्रतिबंधों से राहत पाना और ज़ब्त की गई संपत्तियों की रिहाई शामिल है.
45 तक सीजफायर फिर आखिरी समझौता
इस बीच सीजफायर के मसौदे की विस्तृत जानकारी देते हुए AP ने लिखा है कि ईरान और अमेरिका को एक मसौदा प्रस्ताव मिला है, जिसमें युद्ध को खत्म करने का रास्ता खोजने की कोशिश के तहत 45 दिनों के संघर्ष-विराम और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात कही गई है.
दोनों अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के उन मध्यस्थों की ओर से आया है, जो लड़ाई को रोकने के लिए काम कर रहे हैं.
उन्हें उम्मीद है कि 45 दिनों की यह अवधि दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत के लिए पर्याप्त समय देगी, ताकि एक स्थायी संघर्ष-विराम तक पहुंचा जा सके.
अधिकारियों ने बताया कि ईरान और अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है; यह प्रस्ताव रविवार देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के मध्य-पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ, दोनों को भेजा गया था.
अधिकारियों ने इन निजी वार्ताओं पर चर्चा करने के लिए अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बात की.
यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष इन शर्तों पर सहमत होंगे या नहीं.
ईरान ने इस बात पर जोर दिया है कि वह तब तक लड़ता रहेगा, जब तक उसे आर्थिक मुआवज़ा और यह वादा नहीं मिल जाता कि उस पर दोबारा हमला नहीं किया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली घरों पर बमबारी करने की धमकी दी है.
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