ईरान की जंग में कूदेगा पाकिस्तान? हमलों से घबराया सऊदी, मुनीर संग तेहरान को रोकने पर बड़ी चर्चा

अमेरिका-इजरायल और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब भी सीधे निशाने पर आ गया है. सऊदी ऑयल फील्ड पर ड्रोन हमल हो रहे हैं. इस बीच सऊदी रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अहम बैठक हुई. इसमें ईरान के हमलों को रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की गई, जिससे पाकिस्तान की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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आसिम मुनीर मीटिंग के लिए रियाद पहुंचे थे. (Photo- ITG/@kbsalsaud) आसिम मुनीर मीटिंग के लिए रियाद पहुंचे थे. (Photo- ITG/@kbsalsaud)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान लगातार उन खाड़ी मुल्कों को निशाना बना रहा है, जिन्होंने अमेरिका को शह दे रखी है. शुरुआत में सिर्फ सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जा रहा था, लेकिन ताजा हमलों में देखा गया है कि सऊदी के ऑयल फील्ड को भी टारगेट किया जा रहा है. इस बीच किंगडम के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की और ईरान के हमलों को रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा की है. उनके बयान को एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि क्या अब पाकिस्तान भी ईरान की जंग में शामिल होगा?

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सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से मुलाकात की. यह महज एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि इस दौरान दोनों देशों के बीच हुए सैन्य समझौते के तहत ईरान के हमलों को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई.

सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात हुई. हमने किंगडम (सऊदी अरब) पर ईरान के हमलों और उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की. यह चर्चा हमारे संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई. हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं."

सऊदी के ऑयल फील्ड, एयरपोर्ट पर हमले की कोशिश

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हाल के दिनों में ईरान ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने छह ड्रोन मार गिराए, जिनका टारगेट शायबा ऑयल फील्ड था. यह तेल क्षेत्र संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सीमा के पास स्थित एक विशाल तेल क्षेत्र है. कहा जा रहा है कि चार अलग-अलग हमलों में 6 ड्रोन दागे गए थे. इन ड्रोन को रेगिस्तान में मार गिराया गया. इसके बाद दो अन्य बैलिस्टिक मिसाइल भी दागी गईं, जिन्हें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट कर दिया गया.

इस जंग में सऊदी अरब के ऑयल फील्ड को सीधे पहले भी निशाना बनाया गया है. इससे पहले 2019 में भी इसी तेल क्षेत्र पर हमला हुआ था, लेकिन तब यह हमला यमन में मौजूद ईरानी समर्थित हूती विद्रोहियों ने किया था. अब ईरान खुद सीधे हमले कर रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है. हालांकि ऑयल फील्ड की तरफ मार गिराया गया ड्रोन कहां से आया था, इस बारे में रक्षा मंत्रालय ने खबर लिखे जाने तक जानकारी नहीं दी है.

ईरान की जंग में पाकिस्तान का रोल क्या है?

इस बीच पाकिस्तान ने भी संकेत दिए हैं कि वह सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा समझौते को गंभीरता से ले रहा है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में एक खुलासा भी किया. उन्होंने कहा कि ईरान ने हाल ही में सऊदी अरब पर जो हमले नहीं किए, या बहुत कम प्रतिक्रिया दी, उसके पीछे पाकिस्तान की कूटनीति काम कर रही थी.

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इशाक डार ने बताया, "पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रणनीतिक रक्षा समझौता है. जब तनाव बढ़ा, तो हमने तुरंत ईरान से संपर्क किया और उन्हें आगाह किया कि वे इस समझौते को ध्यान में रखें. ईरान ने हमसे आश्वासन मांगा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल उनके खिलाफ नहीं किया जाएगा. हमने उन्हें यह आश्वासन भी दिया."

क्या अब जंग फैलेगी?

अब तक चल रहे इस संघर्ष में खाड़ी देशों ने खुद को सीधे टकराव से दूर रखा था. अमेरिका ने भी अपने हमलों के लिए इन देशों की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया था. लेकिन अगर ईरान के हमले जारी रहे और सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है.

अगर पाकिस्तान सऊदी अरब की तरफ से ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होता है, तो यह जंग अब सिर्फ पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) तक सीमित नहीं रहेगी. यह सीधे तौर पर दक्षिण एशिया में भी फैल जाएगी, जहां पाकिस्तान और ईरान के बीच लंबी सीमा लगती है.

मसलन, पाकिस्तान ने अभी फिलहाल ईरान को रोकने की कोशिश की है और कूटनीतिक रास्ता निकाला है. लेकिन अगर ईरान ने सऊदी अरब पर बड़े पैमाने पर हमले जारी रखे, तो पाकिस्तान पर अपने रक्षा समझौते के तहत सैन्य कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तेहरान अगला कदम क्या उठाता है.

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