ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी बलों ने उस पर कोई हमला किया, तो जवाबी कार्रवाई में वह मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को सीधे निशाना बनाएगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कतर के एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि इस तरह की कार्रवाई को उन देशों के खिलाफ हमला नहीं माना जाना चाहिए जिनमें अमेरिकी बेस स्थित हैं.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में परमाणु वार्ता हुआ. दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक करार दिया है और इसे जारी रखने पर सहमति जताई है, हालांकि अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगला दौर अगले हफ्ते की शुरुआत में हो सकता है.
अराघची ने इस बातचीत में धमकी और दबाव से बचने पर जोर दिया. उन्होंने साफ़ कहा कि ईरान केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर ही चर्चा करेगा और मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय समूहों को समर्थन या आंतरिक मामलों पर बातचीत करने को तैयार नहीं है.
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अमेरिका लगातार ईरान से यूरेनियम संवर्धन बंद करने की मांग करता रहा है, जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताते हुए यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है.
पिछले साल जून में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. इसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइलों से हमला किया था. अराघची ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका फिर हमला करता है, तो वह फिर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा, लेकिन पड़ोसी देशों को नुकसान नहीं पहुंचेगा. उन्होंने कहा, “हम अमेरिकी जमीन पर हमला नहीं कर सकते, लेकिन क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचाएंगे.”
ईरान का मानना है कि मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत उसे इजरायल जैसे दुश्मनों के सामने कमजोर बना देगी, इसलिए वह इस मुद्दे पर बातचीत से साफ़ इनकार करता रहा है.
इनपुट: रॉयटर्स
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