अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के लिए युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. इसके साथ ही तेहरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को अस्थायी तौर पर आंशिक रूप फिर से खोलने पर भी सहमति जताई. लेकिन होर्मुज में पूरा ट्रैफिक ऑपरेशन ईरान की देखरेख में ही होगा.
व्हाइट हाउस ने बताया कि इजरायल भी इस युद्धविराम पर सहमत हो गया है. ट्रंप ने घोषणा की कि उन्हें ईरान से 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जो दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार है. इसका मतलब है कि अब तीनों देशों की बातचीत इन्हीं 10 बिन्दुओं पर होगी.
लेकिन ईरान की इस योजना में आखिर है क्या, और क्या ट्रम्प इसे स्वीकार करेंगे? अगर वे इस योजना को स्वीकार भी करेंगे तो कितनी सीमा तक.
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार ईरान युद्ध की समाप्ति तभी स्वीकार करेगा जब उन विवरणों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा.
इन 10 बिंदुओं की सूची में कई ऐसी शर्तें शामिल हैं जिन्हें अमेरिका ने पहले अस्वीकार कर दिया था. इस प्रस्ताव की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं.
1.ईरान पर फिर से हमला न करने की प्रतिबद्धता
2.होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण जारी रहेगा
3.यूरेनियम एनरिचमेंट को अमेरिका मान्यता देगा
4.सभी प्राइमरी प्रतिबंधों को हटाना
5.सभी सेकेंडरी प्रतिबंधों को हटाना
6.UNSC के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
7.बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
8. ईरान को मुआवजे का भुगतान
9. मध्य-पूर्व से अमेरिकी सैनिकों की वापसी
10.लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ, समेत सभी मोर्चों पर युद्ध विराम.
इन प्रस्तावों का सार यह है कि अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को रिलीज करेगा. और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव किया जाएगा जिससे डील सभी पक्षकारों पर बाध्यकारी होगा.
द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान ने फारसी भाषा में जो 10 सूत्रीय प्रस्ताव जारी किया है उसमें 'एनरिचमेंट को मान्यता' भी लिखा है. लेकिन कुछ अस्पष्ट कारणों की वजह से अंग्रेजी वर्जन में ये बात नहीं है.
होर्मुज स्ट्रेट के लिए इस प्लान में क्या है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति ईरानी सेना ही देगी और स्ट्रेट क्रॉस करने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान की सेना के साथ सहयोग करना पड़ेगा.
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ईरान इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ कितनी ढीली करेगा. ताजा रिपोर्ट के अनुसार सीजफायर के बाद होर्मुज से जिन जहाजों ने गुजरने की कोशिश की है उन्हें लौटा दिया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार यह योजना ईरान और ओमान को स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर तक का शुल्क लगाने की अनुमति देती है. इसके बाद ईरान इस राशि का उपयोग पुनर्निर्माण कार्यों के लिए करेगा.
यदि शांति वार्ता विफल हो जाती है तो तेहरान फिर से होर्मुज को बंद करने का प्रयास कर सकता है. अभी तक होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है.
क्या अमेरिका इस 10-सूत्रीय योजना और ईरान के प्रस्तावों पर सहमत होगा?
ईरान की यह मांग कि वह हॉर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा, विशेष चिंता का विषय बनकर उभरी है, क्योंकि संघर्ष शुरू होने से पहले स्ट्रेट पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था. इजरायल भी होर्मुज पर जंग के पहले वाली स्थिति चाहता है.
डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने ईरान की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर यह समझौता ईरान को होर्मुज को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, तो यह दुनिया के लिए एक बड़ी तबाही होगी.
ट्रंप ने खुद ईरान की मांगों पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल करने में मदद करेगा.
इसके अलावा ईरान की कुछ प्रमुख रणनीतिक मांगें हैं जिन पर अमेरिका को आपत्ति हो सकती है.
सभी प्रतिबंधों को हटाना
ये ईरान की प्रमुख मांग है, लेकिन ऐसी संभावना कम ही है कि अमेरिका ईरान के इस मांग को मान लेगा. अमेरिका और इजरायल टैरिफ और सैंक्शन पर बात करने के लिए जरूर राजी हैं.
मध्य-पूर्व से अमेरिकी सैना की वापसी
यह भी ईरान की सबसे बड़ी मांगों में से एक है, लेकिन अमेरिका इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा. मध्य-पूर्व के कई देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं.
परमाणु एनरिचमेंट का अधिकार
ईरान चाहता है कि उसके परमाणु कार्यक्रम को मान्यता मिले और वह यूरेनियम संवर्धन करता रहे. लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका सबसे मुखर विरोध रहा है. ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु बम नहीं होगा.
फ्रीज फंड को रिलीज करने की मांग
अमेरिका ने ईरान के लगभग 2 अरब डॉलर के फंड सीधे अपने यहां फ्रीज कर रखे हैं. यह आंकड़ा कांग्रेस रिसर्च सर्विस और अलग अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है. इसमें ईरान की बैंक अकाउंट्स में रखा पैसा और अमेरिका में मौजूद रियल एस्टेट शामिल है. ईरान के कुल फ्रीज एसेट्स दुनिया भर में 100 से 120 अरब डॉलर के बीच अनुमानित हैं.
इनमें से सिर्फ लगभग 2 अरब डॉलर अमेरिका में डायरेक्ट फ्रीज हैं. बाकी जापान, साउथ कोरिया, चीन, इराक आदि देशों के बैंकों में फ्रीज हैं.
इस समझौते पर चर्चा के दौरान अमेरिका इनमें से कुछ रकम को ईरान के लिए खोल सकता है. लेकिन इसका इस्तेमाल सिविल उद्देश्यों के लिए करना होगा.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान इन की मांगों को अमेरिका द्वारा स्वीकार किए जाने की संभावना कम है, लेकिन ये मांगें बातचीत का आधार जरूर बनेंगी.
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