ईरान में पिछले 12 दिनों से हो रहे विरोध-प्रदर्शनों ने क्रांति का रूप ले लिया है. गुरुवार रात बड़ी संख्या में ईरान के लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने खामेनेई शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन ने इसी बीच देशभर में इंटरनेट बंद कर दिया और ईरान को अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल से काट दिया.
ईरान में गुरुवार रात के प्रदर्शन निर्वासित प्रिंस रेजा पहलवी के आह्वान पर हुए. उनके एक आह्वान के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की खिड़कियों से नारे लगाने लगे और सड़कों पर उतर आए. ईरान में बीते कई दिनों से जारी प्रदर्शनों में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है जिसे लेकर ट्रंप ने एक बार फिर ईरान में हस्तक्षेप की धमकी दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि अगर ईरानी शासन प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा. एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, 'मैंने उन्हें बता दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा कि वे अपने दंगों के दौरान करते हैं… तो हम उन्हें बहुत जोरदार तरीके से जवाब देंगे.'
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों के साथ जबरदस्ती की तो वो ईरानी शासन को नर्क का रास्ता दिखा देंगे.
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को अपने संदेश में ट्रंप ने कहा, 'आपको आजादी के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए… आप बहादुर लोग हैं. आपके देश के साथ जो हुआ है, वह अफसोसजनक है. आपका देश कभी एक महान देश था.
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी से मुलाकात करेंगे, तो ट्रंप ने कहा कि फिलहाल वो ऐसा नहीं करने जा रहे हैं. ट्रंप ने कहा, 'मैंने उन्हें देखा है, वो अच्छे इंसान लगते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस वक्त ऐसा करना उचित होगा.'
उन्होंने आगे कहा, 'मेरा मानना है कि हमें सबको मैदान में उतरने देना चाहिए और देखना चाहिए कि आखिरकार कौन सा नेता उभरकर आता है.'
पिछले साल 13-24 जून के बीच ईरान और इजरायल के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. दोनों देशों के बीच पुरानी दुश्मनी रही है और दोनों एक-दूसरे के अस्तित्व को ही नकारते हैं. इजरायल ने अपने करीबी सहयोगी अमेरिका की शह पर ईरान के परमाणु प्रोग्राम को निशाना बनाते हुए पहले ईरान पर हमला किया था जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी.
इस युद्ध के आखिरी दो दिनों में अमेरिका भी शामिल हो गया और उसने ईरान के परमाणु प्रोग्राम को भारी नुकसान पहुंचाया था. अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु संयंत्रों को भारी नुकसान हुआ था.
अब अमेरिका एक बार फिर ईरान पर हमले की तैयारी में है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशन में इजरायल साथ देगा. इस सवाल का जवाब अमेरिका में इजरायल के राजदूत माइक हकाबी के बयान में छिपा है जिसमें उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो इजरायल उसका साथ देगा.
राजदूत हकाबी ने गुरुवार को KAN न्यूज से कहा कि ईरान पर हवाई हमले दोबारा शुरू करने या न करने का फैसला इजरायल खुद करेगा.
हकाबी ने कहा, 'मुझे लगता है कि हाल ही में जब राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मिले थे तब दोनों ने इस मुद्दे पर बात की थी. मुझे लगता है कि इस संबंध में कोई भी कदम दोनों नेता आपसी बातचीत और परामर्श के जरिए मिलकर उठाएंगे.' ट्रंप और नेतन्याहू पिछले हफ्ते फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के घर मार-ए-लागो में मिले थे.
इस बीच फ्रांस के अखबार Le Monde की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक नए अटैक प्लान को मंजूरी दे दी है.
ईरान की राजधानी तेहरान समेत देशभर में विरोध-प्रदर्शन काफी तेज हो गए हैं. बीती रात प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की कई मस्जिदों को भी आग के हवाले कर दिया गया. लोगों ने कई इमारतों को भी आग लगा दी.
प्रदर्शन के दौरान लोग नारे लगा रहे हैं कि जब तक देश में मुल्लाओं का शासन रहेगा, ईरान में खुशहाली नहीं आएगी. 'आजादी, आजादी' का नारा लगाते हुए लोग खामेनेई को सत्ता से हटाने की मांग कर रहे हैं.
ईरान की मुद्रा ईरानी रियाल में भारी गिरावट और बढ़ती महंगाई से शुरू हुए आंदोलन ने जल्द ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का रूप ले लिया है. प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों में हो रहे है.
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