ईरान में नए सुप्रीम लीडर को लेकर चल रही अटकलों के बीच मशहद के जुमे की नमाज के इमाम अहमद आलमोलहोदा ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि देश के अगले सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसके लिए मतदान भी हो चुका है. मसलन, ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है लेकिन इसका ऐलान होना बाकी है.
मशहद में जुमे की नमाज पढ़ाने वाले नेता या इमाम आलमोलहोदा ने कहा कि यह खबरें पूरी तरह गलत हैं कि एक्सपर्ट्स की असेंबली अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है. उनके मुताबिक, असेंबली ने पहले ही फैसला ले लिया है और ईरान के संविधान के अनुसार कोई भी शख्स, यहां तक कि असेंबली के सदस्य भी, उस फैसले को बदलने का अधिकार नहीं रखते.
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मशहद के इमाम ने यह भी बताया कि अब यह मामला असेंबली के सचिवालय के प्रमुख आयतोल्लाह होसैनी बुशेहरी के पास है. वो ही आधिकारिक तौर पर इस फैसले को सार्वजनिक करने और देश को नए सुप्रीम लीडर की जानकारी देने के जिम्मेदार हैं.
अली खामेनेई की मौत के बाद नए सुप्रीम लीडर का चुनाव
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद देश में सत्ता के उत्तराधिकारी को लेकर तेजी से घटनाक्रम बदला. खामेनेई की मौत 28 फरवरी को बताई जा रही है, जिसके बाद देश के नेतृत्व को संभालने के लिए एक अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन किया गया था.
इस अंतरिम परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई और वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेजा अराफी शामिल हैं. फिलहाल यही परिषद देश के प्रशासनिक और राजनीतिक मामलों की देखरेख कर रही है.
सुप्रीम लीडर को चुने जाे की प्रक्रिया में बैठकें
नए सुप्रीम लीडर के चयन के लिए एक्सपर्ट्स की असेंबली की पहली आपात बैठक मंगलवार को बुलाई गई थी. लेकिन यह बैठक पूरी नहीं हो सकी. स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली हवाई हमलों के कारण कोम शहर में स्थित असेंबली की इमारत को निशाना बनाया गया, जिसके बाद बैठक को समय से पहले ही समाप्त करना पड़ा.
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ईरान इंटरनेशनल की मानें तो असेंबली के कुछ अन्य सदस्य संकेत दे चुके हैं कि नए नेता को लेकर सहमति बन चुकी है. आयतोल्लाह मोहम्मद मेहदी मीरबाकरी ने कहा कि ज्यादातर सदस्यों के बीच "बहुमत की सहमति" बन गई है, लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हो पाई हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक ईरान की राजनीति में अनिश्चितता बनी रह सकती है. हालांकि अगर आलमोलहोदा का दावा सही साबित होता है तो आने वाले दिनों में ईरान को उसका नया सुप्रीम लीडर मिल सकता है.
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