ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना (Dimona) शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही ठप होने से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है. दर्जनों मालवाहक जहाज और टैंकर अभी भी समुद्र के बीच फंसे हुए हैं, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है. इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि वह 48 घंटों के भीतर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का रास्ता साफ करे नहीं तो अमेरिकी सेना ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाना शुरू कर देगी. पढ़ें जंग से जुड़ी हर ताजा अपडेट-
ईरान ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब युद्ध से पहले जैसी सामान्य स्थिति में वापस नहीं आएगा. ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच कोई बातचीत नहीं चल रही है. न्यूज एजेंसी ने ईरानी अधिकारियों हवाले से दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप दबाव के चलते ईरानी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की अपनी योजना से पीछे हटने का फैसला किया है.
ईरान ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच हालात को शांत करने के प्रयासों का समर्थन किया है. ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोशिशें जारी हैं. हालांकि, तेहरान ने साफ किया कि किसी भी वार्ता में अमेरिका को प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए. ईरान का कहना है कि उसने इस संघर्ष की शुरुआत नहीं की, इसलिए बातचीत की पहल भी अमेरिका को ही करनी होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में दिए गए भाषण की 10 बड़ी बातें आप यहां क्लिक कर बढ़ सकते है ं- भारत की तैयारी, विपक्ष संग एकजुटता, जमाखोरों को वॉर्निंग... ईरान जंग पर PM मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें
लोकसभा में सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित कर रहे हैं. आप प्रधानमंत्री का भाषण यहां देख सकते हैं.
ईरान की डिफेंस काउंसिल ने यूएस और इजरायल को चेताया. कहा कि ईरान के तट या द्वीपों पर हमला होने की स्थिति में खाड़ी के समुद्री मार्ग और संचार लाइनें बाधित हो जाएंगी, और इसके बदले में ईरान के तट सहित अन्य स्थानों पर समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई जाएंगी.
ईरान की तासनीम न्यूज एजेंसी ने बताया है कि अमेरिका-इजरायल ने बुशेहर शहर में मौसम विभाग की इमारत पर दो बार हमला किया. यह ईरान के सबसे संवेदनशील शहरों में से एक माना जाता है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट की जंग को लेकर सीधी और कड़ी चेतावनी दी है. चीन ने कहा, "अगर यह जंग और फैलती रही तो पूरा इलाका एक ऐसे चक्र में फंस जाएगा जहां से निकलना मुश्किल होगा. ताकत के इस्तेमाल से सिर्फ तबाही आएगी."
इनपुट: अशरफ वानी
जंग के बीच आज गोल्ड-सिल्वर के रेट तेजी से गिर रहे हैं. MCX रेट्स में सोना 14,405 हजार रुपये गिरकर 129,858 के आसपास पहुंच गया है. वहीं चांदी की बात करें तो ये 24,307 गिरकर 202,428 के आसपास है.
बता दें कि MCX एक ऐसा बाजार है जहां सोना, चांदी, कच्चा तेल (crude oil), गैस, तांबा जैसी चीज़ों की ट्रेडिंग होती है.
ईरान के लोरेस्तान प्रांत के उप-राज्यपाल ने बताया है कि खोर्रमाबाद शहर में अमेरिका-इजरायल के हमले में 6 आम नागरिक मारे गए और 43 घायल हुए. सबसे अहम बात है कि यह हमला घरों पर हुआ. यानी सैन्य ठिकाना नहीं. आम लोगों के रिहायशी इलाके पर.
इनपुट: अल मयादीन
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, उस दिन से लेकर आज तक तेल की कीमत 55 फीसदी बढ़ चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड यानी कच्चा तेल अभी 112 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा है.
इनपुट: AP
सोमवार को सोने की कीमत में 6 फीसदी की बड़ी गिरावट आई और यह 4,214 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. यह पिछले साल 11 दिसंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है. पिछले हफ्ते अकेले 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. यह 1983 के बाद सोने का सबसे बुरा हफ्ता था. और सबसे चौंकाने वाली बात है कि सोना 29 जनवरी को 5,594 डॉलर के रिकॉर्ड ऊंचाई पर था. वहां से अब तक 20 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है.
क्यों गिर रहा है सोना?
मिडिल ईस्ट की जंग से महंगाई बढ़ने का डर है. महंगाई बढ़ी तो ब्याज दरें बढ़ेंगी. और जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो लोग सोने की बजाय बैंक में पैसा रखना पसंद करते हैं.
लेबनान सरकार ने बताया है कि 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 1029 लोग मारे जा चुके हैं. यह आंकड़ा बताता है कि मिडिल ईस्ट की यह जंग सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है. लेबनान भी उतनी ही तबाही झेल रहा है.
अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिनों की छूट दी और चीन ने मौका देखते ही हाथ बढ़ा दिया. चीन की सरकारी तेल कंपनियां अब ईरान से तेल खरीदने के सौदे तलाश रही हैं. अमेरिका ने यह छूट इसलिए दी थी ताकि दुनिया में तेल की सप्लाई बढ़े और दाम नीचे आएं.
इनपुट: रॉयटर्स, ब्लूमबर्ग न्यूज़ के माध्यम से
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 48 घंटे में होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दिया था और धमकी दी थी कि नहीं खोला तो ईरान के बिजलीघर तबाह कर देंगे. अब ईरान की IRGC यानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सीधा जवाब दिया है. अगर हमारे बिजलीघरों पर हमला हुआ तो हम इजरायल के बिजलीघर तबाह करेंगे. और उन बिजलीघरों को भी निशाना बनाएंगे जो मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को बिजली देते हैं.
इनपुट: रॉयटर्स
मिडिल ईस्ट में जंग का असर अब दुनिया के हर कोने तक पहुंच रहा है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने सिंगापुर के PM लॉरेंस वोंग से मुलाकात की. और दोनों देशों ने मिलकर एक अहम फैसला किया.
दोनों देश एक-दूसरे को डीजल और LNG यानी लिक्विड नेचुरल गैस की सप्लाई सुनिश्चित करेंगे. यानी अगर एक देश को जरूरत पड़े तो दूसरा मदद करेगा.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था - होर्मुज खोलो, वरना बिजलीघर तबाह कर देंगे. उस डेडलाइन के खत्म होने से कुछ घंटे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ प्लेटफॉर्म पर लिखा, 'ताकत से शांति.'
सोमवार को शेयर बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट देखने को मिली. विदेशों से आए खराब संकेतों का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा. सेंसेक्स - BSE का 30 शेयरों वाला सूचकांक खुलते ही 1500 अंक से ज्यादा टूट गया और 72,977 के स्तर पर आ गया. निफ्टी भी पीछे नहीं रहा. NSE का यह सूचकांक 450 अंक की गिरावट के साथ 22,634 पर आ गया. जब जंग होती है तो आमतौर पर सोना-चांदी महंगा होता है. क्योंकि लोग इन्हें सुरक्षित निवेश मानकर खरीदते हैं. लेकिन इस बार उल्टा हो गया. सोना 5 फीसदी गिर गया और चांदी 6 फीसदी धड़ाम हो गई. रुपये में भी गिरावट दर्ज की गई है. पहली बार डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ऑल टाइम लो 93.89 पहुंच गया.
मिडिल ईस्ट में जंग लड़ रहा है अमेरिका. लेकिन उसके अपने लोग इस जंग से खुश नहीं हैं. CBS न्यूज और YouGov ने मिलकर एक सर्वे किया. और इसके नतीजे ट्रंप सरकार के लिए अच्छे नहीं हैं.
66 फीसदी अमेरिकियों का कहना है कि यह जंग जरूरी नहीं थी. यह एक "चुनाव की जंग" है यानी बिना वजह छेड़ी गई लड़ाई. सिर्फ 34 फीसदी लोग मानते हैं कि यह जंग जरूरी थी और 57 फीसदी का कहना है कि जंग बुरी तरह चल रही है.
शेयर बाजार के लिए विदेशों से एक बार फिर बुरे सिग्नल आए हैं. जापान से लेकर साउथ कोरिया तक के बाजारों में कोहराम मचा हुआ है और ये भर-भराकर टूटे हैं.
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मिडिल ईस्ट में जब से जंग छिड़ी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रणनीति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. शुरू में तो उन्होंने कहा था कि ये जंग कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी. लेकिन अब यह चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है. पूरी ख़बर को यहां क्लिक कर पढ़ें - होर्मुज पर ट्रंप की बदलती रणनीति से उठे सवाल, क्या बिना एग्जिट प्लान के जंग में उतरा अमेरिका?
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर 23 मार्च को ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर एक आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता करेंगे. जिसमें वित्त मंत्री राचेल रीव्स और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली भी शामिल होंगे.
ईरान की राजधानी तेहरान के कई हिस्सों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं. दूसरी तरफ सऊदी अरब के रियाद की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें देखी गईं.
ईरान में IRGC जवान द्वारा मिसाइल पर स्पेन PM पेड्रो सांचेज की तस्वीर लगाने की फोटो वायरल है, जो उनके बयान पर समर्थन का प्रतीक मानी जा रही है. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - ईरानी मिसाइलें पर स्पेन PM की तस्वीर... ट्रंप को चिढ़ा रहा तेहरान? जानें मामला
International Energy Agency (IEA) ने माना कि मिडिल ईस्ट में हालात बेहद गंभीर हैं. IEA प्रमुख बिरोल ने कहा कि मौजूदा समस्याओं का सबसे बड़ा और एकमात्र समाधान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलना है. उन्होंने कहा कि यह संकट 1970 के दशक के दो तेल संकटों को मिलाकर भी कहीं ज़्यादा गंभीर है.
IRGC के लड़ाके बैलिस्टिक मिसाइल पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के स्टिकर लगा रहे हैं. इन स्टिकर्स पर उनका वह बयान छपा है जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध की आलोचना की है और अपने इस रुख के लिए उनकी सराहना की है.
मिडिल ईस्ट जंग पर पोप लियो ने कहा, 'इन युद्धों से होने वाली मृत्यु और पीड़ा, संपूर्ण मानव परिवार के लिए एक कलंक है और ईश्वर तक पहुंचने वाली एक चीख है.'
ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध और खतरनाक होता जा रहा है. सोमवार आधी रात के बाद इजरायल, यरुशलम और वेस्ट बैंक का आसमान क्लस्टर वारहेड से लैस ईरानी मिसाइलों की रोशनी से दहल उठा. मिसाइल हमलों के बाद कई इलाकों में एयर रेड सायरन बज उठे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए अलर्ट जारी किया गया. पढ़ें पूरी खबर
शहबाज शरीफ सरकार ने लग्जरी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-ऑक्टेन ईंधन पर शुल्क को ₹100 से बढ़ाकर ₹300 प्रति लीटर कर दिया है. वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और क्षेत्रीय तनाव के कारण पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता जा रहा है। U.S. Central Command (CENTCOM) ने एक नया वीडियो जारी कर दावा किया है कि अमेरिकी सेना लगातार ईरान के वन-वे अटैक ड्रोनक्षमता को नष्ट कर रही है. अमेरिकी सेना का कहना है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल क्षेत्र में अंधाधुंध हमलों के लिए किया जा रहा था, जिनमें नागरिकों को भी निशाना बनाया गया.
इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग अब लेबनान तक फैल गई है. रविवार को इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान सीमा पर बड़े पैमाने पर सैन्य वाहनों और सैनिकों की तैनाती की है. यह कदम हिजबुल्लाह द्वारा इजरायली क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर रॉकेट हमलों के जवाब में उठाया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स को "मिटाने" की धमकी के बाद, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने होर्मुज की स्थिति को स्पष्ट करते हुए इसे अमेरिका द्वारा शुरू किया गया "चुनिंदा युद्ध" करार दिया. विदेश मंत्री ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट आधिकारिक तौर पर बंद नहीं है. उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही इसलिए रुकी है क्योंकि बीमा कंपनियां अमेरिका द्वारा शुरू किए गए युद्ध से डरी हुई हैं, न कि ईरान से.
सोमवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात के विभिन्न हिस्सों में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं. UAE के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये आवाजें ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करने के कारण हुई थीं. मंत्रालय के अनुसार, UAE की वायु रक्षा प्रणालियों और लड़ाकू विमानों ने कई खतरों को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया है.