होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. एक तरफ ईरान ने दावा किया है कि उसने इस अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नया सिस्टम तैयार कर लिया है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बात से सहमत हैं कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोलना चाहिए.
इन बयानों ने दुनिया भर का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है क्योंकि होर्मुज वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. रास्ता बंद होने की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहरा गया है. भारत में भी इसका असर अब देखने को मिल रहा है.
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख ने कहा कि देश ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए एक नया मैकेनिज्म तैयार किया है. उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था का खुलासा जल्द किया जाएगा.
ईरानी अधिकारी के मुताबिक, जहाजों की आवाजाही एक तय रूट के जरिए कराई जाएगी. यानी समुद्री जहाजों के लिए विशेष रास्ता और नियम तय किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस सिस्टम का फायदा सिर्फ उन कमर्शियल जहाजों और पक्षों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग करेंगे.
ईरान ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था के तहत दी जाने वाली विशेष सेवाओं के लिए फीस ली जाएगी. यानी जहाजों को कुछ सेवाओं के बदले भुगतान करना पड़ सकता है.
सबसे अहम बात यह रही कि ईरान ने कहा कि यह रूट 'फ्रीडम प्रोजेक्ट' के ऑपरेटरों के लिए बंद रहेगा. हालांकि ईरान ने यह साफ नहीं किया कि वह किन देशों या संगठनों को 'फ्रीडम प्रोजेक्ट' का हिस्सा मानता है.
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया. बीजिंग दौरे से लौटते समय ट्रंप ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बात से सहमत हैं कि तेहरान को होर्मुज को फिर से खोलना चाहिए.
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हालांकि चीन की तरफ से सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी सहमति की पुष्टि नहीं की गई है. शी जिनपिंग ने ईरान को लेकर हुई बातचीत पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया.
चीन के विदेश मंत्रालय ने इतना जरुर कहा कि यह संघर्ष कभी होना ही नहीं चाहिए था और अब इसे आगे बढ़ाने का कोई कारण नहीं है. इस बयान को क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील के तौर पर देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी तेल कंपनियों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं या नहीं. चीन इस समय ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है. खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव, रोक या नया नियंत्रण सीधे वैश्विक तेल बाजार पर असर डाल सकता है.
ईरान और अमेरिका के इन बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है. दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि ईरान अपने नए मैकेनिज्म का खुलासा कैसे करता है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.
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