ईरान के जनरल वाहिदी के 'वॉर प्लान' में फंसे ट्रंप-नेतन्याहू, कहा जाता है 'दुश्मनों का काल'

ईरान और इज़रायल-अमेरिका के बीच जारी जंग में जनरल अहमद वाहिदी सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. IRGC की कमान संभालने के बाद उन्होंने ऐसी रणनीति तैयार की है, जो पारंपरिक युद्ध से अलग है. उनके 'वॉर प्लान' को लेकर दावा है कि इसने अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है.

Advertisement
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के चीफ अहमद वाहिदी बड़े रणनीतिकार बनकर सामने आए हैं. (File Photo: ITG) इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के चीफ अहमद वाहिदी बड़े रणनीतिकार बनकर सामने आए हैं. (File Photo: ITG)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:23 AM IST

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान के ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी सुर्खियों में हैं. 28 फरवरी को इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) प्रमुख की मौत के बाद उनको इस शक्तिशाली सैन्य संगठन की कमान सौंपी गई. अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब देने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. 

Advertisement

यही वजह है कि जनरल अहमद वाहिदी अमेरिका और इजरायल की 'हिट लिस्ट' में सबसे ऊपर हैं. ईरान में उनको एक ऐसे रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है, जिसे हराना आसान नहीं है. कहा जाता है कि मोसाद और सीआईए जैसी एजेंसियां भी अब तक उन्हें रोक नहीं सकी हैं. आज वो IRGC के कमांडर इन चीफ हैं, जो ईरान के सबसे ताकतवर पदों में से एक माना जाता है. 

जनरल वाहिदी कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रह चुके हैं, जो सैन्य और खुफिया ऑपरेशन संभालती है. वो साल 2009 से 2013 तक ईरान के रक्षा मंत्री रह चुके हैं. साल 2021 से 2024 तक उन्होंने गृहमंत्री के तौर पर भी काम किया. करीब 3 दशक तक अयातुल्ला अली खामेनेई की कोर टीम का हिस्सा रहे हैं. 31 दिसंबर 2025 को उन्हें IRGC का डिप्टी कमांडर इन चीफ नियुक्त किया था.

Advertisement

ईरान की सैन्य रणनीति, खासकर विदेशी ऑपरेशन और डिफेंस सिस्टम के विकास में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. मौजूदा युद्ध में जनरल वाहिदी की रणनीति पारंपरिक युद्ध से अलग बताई जा रही है. उनका पूरा प्लान 'असिमेट्रिकल वारफेयर' यानी गुरिल्ला युद्ध पर आधारित है. इस रणनीति में कम संसाधनों के बावजूद बड़े और ताकतवर दुश्मन को कई मोर्चों पर उलझाया जाता है.

इसमें गुरिल्ला हमले, आर्थिक दबाव, लंबा युद्ध और मनोवैज्ञानिक असर जैसे तत्व शामिल होते हैं. ईरान ने कई फ्रंट पर जवाबी हमले किए हैं. अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, दुश्मन के रडार और हथियार सिस्टम को नुकसान पहुंचाया गया. इसके साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखते हुए तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

मिडिल ईस्ट के एयरपोर्ट और तेल-गैस ठिकानों पर हमले कर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. IRGC पांच प्रमुख हिस्सों में बंटा हुआ है. थल सेना, नौसेना, वायुसेना, कुद्स फोर्स और बासिज. कुद्स फोर्स विदेशों में प्रॉक्सी नेटवर्क संभालती है, जबकि बासिज आंतरिक सुरक्षा और विरोध को नियंत्रित करने का काम करती है. थल, वायु और नौसेना पारंपरिक सैन्य अभियानों को अंजाम देती हैं.

जनरल वाहिदी को ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम से भी जोड़ा जाता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन कार्यक्रमों में उनकी अहम भूमिका रही है. यही कारण है कि लंबे समय से इजरायल की नजर उन पर बनी हुई है. हालांकि, अब तक इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां उन्हें नुकसान पहुंचाने में सफल नहीं हो पाई हैं. वाहिदी पर अमेरिका ने एक हमले का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा रखा है.

Advertisement

ये हमला साल 1994 में ब्यूनस आयर्स में यहूदी सांस्कृतिक केंद्र पर हुआ था. इसके बावजूद, ईरान में उनकी स्थिति मजबूत बनी हुई है और मौजूदा युद्ध में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है. मौजूदा हालात में, जब ईरान के कई शीर्ष सैन्य नेता मारे जा चुके हैं और नेतृत्व दबाव में है, ऐसे में जनरल वाहिदी पर पूरी रणनीतिक जिम्मेदारी आ गई है. उनका 'वॉर प्लान' इस संघर्ष में अहम भूमिका निभा रहा है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement