'तभी होगी बातचीत...', इस्लामाबाद वार्ता से ठीक पहले ईरान ने US के सामने रखीं दो बड़ी शर्तें

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत से पहले दो शर्तें पूरी होनी जरूरी हैं. उनके इस बयान से प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता पर अनिश्चितता बढ़ गई है. इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत के लिए इस्लामाबाद रवाना हो चुके हैं.

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ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ के सोशल मीडिया पोस्ट से हलचल तेज हो गई है (File Photo- ITG) ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ के सोशल मीडिया पोस्ट से हलचल तेज हो गई है (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:23 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने कूटनीतिक बातचीत को लेकर सख्त रुख अपना लिया है. ईरान ने शांति वार्ता से ऐन पहले अमेरिका के सामने दो शर्तें रख दी हैं. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने कहा है कि जब तक दो अहम शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है. इस बीच अमेरिका ने शांति वार्ता विफल होने पर हमले तेज करने की धमकी दी है.

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गालिबफ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वार्ता शुरू करने से पहले दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो जरूरी मुद्दों का समाधान होना चाहिए. पहला- लेबनान में तत्काल और प्रभावी सीजफायर लागू हो, और दूसरा- ईरान के ब्लॉक किए गए फंड्स को रिलीज किया जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये दोनों शर्तें पूरी होने के बाद ही बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.

यानी साफ है कि बातचीत से पहले ईरान अब कोई समझौता करने के मूड में नहीं है और उसका रुख और सख्त हो गया है.

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता होने जा रही है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जो इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत के लिए रवाना हो चुके हैं. हालांकि, गालिबफ के इस सख्त रुख ने इन वार्ताओं के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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ईरान की यह मांग सीधे तौर पर क्षेत्रीय हालात से जुड़ी है. लेबनान में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है. ऐसे में तेहरान चाहता है कि पहले जमीनी स्तर पर शांति स्थापित हो, तभी किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए.

दूसरी ओर, ईरान लंबे समय से अपने फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड्स की वापसी की मांग करता रहा है. यह फंड्स अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते विभिन्न देशों में अटके हुए हैं. गालिबफ के बयान से साफ है कि तेहरान इस मुद्दे को अब बातचीत की पूर्व शर्त के तौर पर देख रहा है.

इस बीच, अमेरिका की ओर से भी सख्त संकेत दिए गए हैं. उपराष्ट्रपति वेंस ने रवाना होने से पहले कहा कि यदि ईरान ईमानदारी से बातचीत करेगा तो अमेरिका तैयार है, लेकिन अगर वह खेल खेलने की कोशिश करता है, तो प्रतिक्रिया भी उसी हिसाब से होगी.

ट्रंप ने भी दे डाली धमकी

वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को 'द पोस्ट' को बताया कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता विफल हो जाती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू करने के लिए अमेरिकी युद्धपोतों में सबसे बेहतरीन गोला-बारूद फिर से भरा जा रहा है. जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि बातचीत सफल होगी, तो उन्होंने एक फोन इंटरव्यू में कहा, 'हमें लगभग 24 घंटों में पता चल जाएगा. हमें जल्द ही सच्चाई मालूम हो जाएगी.' 

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उन्होंने कहा कि हम एक तरह से फिर से शुरुआत कर रहे हैं. हम जहाजों में सबसे बेहतरीन गोला-बारूद और अब तक बने सबसे बेहतरीन हथियार भर रहे हैं. ये पहले इस्तेमाल किए गए हथियारों से भी कहीं ज़्यादा बेहतर हैं और पिछली बार तो हमने उन्हीं हथियारों से उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया था.

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