मध्य पूर्व में जारी जंग और तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है. ईरान में हिरासत में लिए गए भारतीय नाविकों में से बचे हुए आठ सदस्य अब अपने वतन लौट आए हैं. ये नाविक यूएई बेस्ड टैंकर एमटी वैलिएंट रोअर पर सवार थे, जिसे 8 दिसंबर 2025 को ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जब्त कर लिया था. ईरान ने जहाज पर 6000 टन ईंधन की तस्करी का आरोप लगाया था.
हालांकि जहाज की ऑपरेटिंग कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह वैध लो-सल्फर फ्यूल ऑयल लेकर जा रहा था. रविवार, 22 मार्च को कैप्टन विजय कुमार समेत आठ भारतीय नाविकों का आखिरी बैच ईरान के बंदर अब्बास से रवाना हुआ था. ये सभी नाविक टैक्सी के जरिए करीब 2000 किलोमीटर का सफर तय कर आर्मेनिया बॉर्डर तक पहुंचे, जहां से उनकी भारत वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.
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इससे पहले, 16 में से पहले आठ नाविकों को 11 फरवरी 2026 को रिहा कर दिया गया था. उनकी रिहाई में दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की अहम भूमिका रही थी. हिरासत के दौरान नाविकों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कुछ नाविकों को बंदर अब्बास की जेल में रखा गया था, जबकि बाकी को जहाज पर ही रोका गया था. लंबे समय तक परिवारों से संपर्क न होने के कारण उनके परिजनों में चिंता बनी हुई थी.
इस पूरे मामले में भारत सरकार ने सक्रिय भूमिका निभाई. विदेश मंत्रालय और बंदर अब्बास स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने लगातार कोशिश कर नाविकों को कांसुलर एक्सेस दिलाया और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की.
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जनवरी में ही नाविकों को पहली बार अपने परिवारों से बात करने की इजाजत मिली थी, जिससे उनके घरवालों को बड़ी राहत मिली थी. इसके बाद भारत सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ मिलकर एक रणनीति बनाई, जिससे धीरे-धीरे सभी नाविकों की रिहाई संभव हो सकी.
हालांकि क्षेत्र में जारी जंग, हवाई हमलों और अस्थिर हालात के कारण आखिरी बैच की वापसी में देरी हुई. लेकिन अब सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी लगभग पूरी हो चुकी है.
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