'ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर कम होगा दबाव...', भारत को रूसी तेल खरीद की छूट पर बोले डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट देने का फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव कम करने के लिए लिया गया है. उन्होंने साफ किया कि ये छूट केवल उन शिपमेंट्स पर लागू होगी जो पहले से रास्ते में हैं, ताकि अचानक आपूर्ति में कमी न हो.

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ग्लोबल मार्केट से दबाव कम करेगी रूसी तेल की खरीद: ट्रंप (File photo: ITG) ग्लोबल मार्केट से दबाव कम करेगी रूसी तेल की खरीद: ट्रंप (File photo: ITG)

aajtak.in

  • वाशिंगटन,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:54 AM IST

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण बढ़ती कीमतों के दबाव को कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी कच्चे तेल खरीद की छूट दे दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये छूट केवल उन शिपमेंट के लिए है जो पहले से ही रास्ते में थे, ताकि अचानक होने वाली कमी से बचा जा सके.

एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'अगर कुछ और कदम उठाए जा सकते हैं तो मैं उन्हें भी उठाऊंगा, सिर्फ थोड़ा दबाव कम करने के लिए.'

उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक तेल सप्लाई मजबूत है और अमेरिका के पास भी भरपूर तेल है. 'दुनिया में बहुत सारा तेल है. हमारा देश बहुत सारा तेल उत्पादन करता है. ये समस्या जल्दी ठीक हो जाएगी.'

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भारत ने किया हमारी मांग पर अमल 

अमेरिकी अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारतीयों ने 'बेहतरीन एक्टर्स' की भूमिका निभाई है. अमेरिका ने पहले भारत से रूसी तेल की खरीद रोकने को कहा था, जिस पर भारत ने अमल भी किया और इसे अमेरिकी तेल से बदलने की तैयारी की थी. हालांकि, वर्तमान वैश्विक संकट और तेल की अस्थायी कमी को देखते हुए अमेरिका ने अब भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी है.

जारी है ग्लोबल सप्लाई 

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि ये छुट सीमित दायरे में है और इसका उद्देश्य मॉस्को के प्रति व्यापक नीति को बदलना नहीं है. इस कदम से वैश्विक कीमतों को स्थिर रखने और आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने मदद मिलेगी. एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने इसे शॉर्ट-टर्म कदम बताया, जो ग्लोबल कीमतों को स्थिर रखने और सप्लाई जारी रखने के लिए है.

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अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, ये वैवर केवल उन शिपमेंट्स पर लागू है जो 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुके थे और 3 अप्रैल तक वैध रहेगी. इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में अचानक कमी को रोकना और कीमतों को स्थिर रखना है. अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये व्यापक नीति में बदलाव नहीं है और रूस के प्रति नीति वही रहेगी.

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