होर्मुज ब्लॉकेड के लिए US ने उतारे 10 हजार कमांडो, फारस की खाड़ी पर अमेरिकी कंट्रोल!

अमेरिका ने होर्मुज ब्लॉकेड को सफल बनाने के लिए जबरदस्त मिलिट्री ताकत लगा दी है, ताकि ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सके. अमेरिका ने साफ कहा है कि ईरान के बंदरगाहों से किसी भी तरह का व्यापार नहीं हो सकता है. ऐसा करने वाले जहाज सीधे समुद्र में डूबो दिए जाएंगे.

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US सेंट्रल कमान के तहत काम कर रहा फाइटर जेट F-35 B (Photo: X/@CENTCOM) US सेंट्रल कमान के तहत काम कर रहा फाइटर जेट F-35 B (Photo: X/@CENTCOM)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी लागू करने के लिए 10,000 से अधिक अमेरिकी नेवी के जवान, मरीन और एयरमैन को उतार दिया है. इसके अलावा इस नाकेबंदी को अंजाम देने के लिए एक दर्जन युद्धपोत समंदर में एक एक दर्जन एयरक्राफ्ट आसमान में तैनात हैं. अमेरिका का कहना है कि पहले 24 घंटों के दौरान कोई भी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी को पार नहीं कर पाया. 

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इसके अलावा 6 मालवाहक जहाजों ने अमेरिकी सेना के निर्देश का पालन करते हुए वापस मुड़कर ओमान की खाड़ी पर स्थित एक ईरानी बंदरगाह में दोबारा प्रवेश किया. 

CENTCOM के आधिकारिक ट्वीट और इन्फोग्राफिक में स्पष्ट कहा गया है कि यह नाकाबंदी सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू है. इस नाकाबंदी का उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकना है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैसे जहाजों को आजादी है जो ईरान के बंदरगाहों में नहीं जा रहे हैं.  

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक इन्फोग्राफिक में दिखाया गया है कि नाकाबंदी की लाल रेखा ईरान के तट के साथ-साथ खींची गई है, जिससे ईरानी तेल निर्यात और आयात पूरी तरह ठप हो जाएंगे. 

अमेरिका के अनुसार इस मिशन में 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी सर्विसमैन शामिल हैं. इस मिशन में 100 से ज्यादा फाइटर और सर्विलांस एयरक्राफ्ट की तैनाती की गई है. 

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इस मिशन में अमेरिका ने अपनी बड़ी सैन्य ताकत झोक दी है. इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर, एम्फीबियस असॉल्ट शिप, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, लिटोरल कॉम्बैट शिप शामिल हैं. 

यह अभियान ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का हिस्सा माना जा रहा है. इससे तेल निर्यात पर निर्भर ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगने की आशंका है. CENTCOM ने जोर दिया कि नाकाबंदी निष्पक्ष है और केवल ईरानी बंदरगाहों तक सीमित है.

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में एक बार फिर से शांति वार्ता हो सकती है. 

पाकिस्तान ने भी कहा है कि इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के साथ बातचीत के दूसरे दौर का प्रस्ताव रखा है. 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इससे पहले कहा था कि ईरान के साथ बातचीत में "कुछ प्रगति हुई है" और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा, "दूसरी तरफ से हमें बुलाया गया है" और "वे कोई समझौता करना चाहते हैं."

पाकिस्तानी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह बात कही क्योंकि उन्हें प्रेस के साथ इस मामले पर चर्चा करने का अधिकार नहीं था.

होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी की वर्तमान स्थिति

अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट की पूरी नाकाबंदी नहीं की है. CENTCOM के बयान और इन्फोग्राफिक के अनुसार अमेरिकी सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गैर-ईरानी बंदरगाहों जैसे सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर, ओमान आदि के लिए आने-जाने वाले सभी जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान कर रहे हैं. 

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केवल ईरानी बंदरगाहों जैसे बंदर अब्बास, बुशहर, चाबहार में एंट्री करने वाले या वहां से निकलने वाले जहाजों को रोका जा रहा है. 

इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ईरान का तेल निर्यात लगभग शून्य हो जाएगा. CENTCOM ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा सिर्फ ईरानी जहाजों/ईरान से संबंधित कार्गो को टारगेट किया जा रहा है. 

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